
जयपुर
भारत बंद के दौरान एससी-एसटी वर्ग ( SC-ST ) के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को न्यायालय से शीघ्र वापिस लेने की मांग को लेकर रविवार को राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री रमेशचंद मीना ( minister ramesh chand meena ) के नेतृत्व में कई मंत्री व विधायकों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Cm Ashok Gehlot ) को ज्ञापन सौंपा। इस पर मुख्यमंत्री गहलोत ने एससी-एसटी वर्ग के विधायकों के प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।
ज्ञापन में कही गईं ये बातें...
इस ज्ञापन में उल्लेख है कि 2 अप्रेल, 2018 को अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग द्वारा भारत बंद के आह्वान के दौरान दर्ज मुकदमों में एससी-एसटी वर्ग के कई निर्दोष लोग भी फंसे हुए हैं। दरअसल एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के बारे में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 20 मार्च 2018 के संदर्भ में यह भारत बंद का आह्वान किया गया था। उन्होंने बताया कि राज्य के कई जिलों में शांतिपूर्ण आंदोलन व रैलियों के दौरान कई स्थानों पर अन्य सामाजिक संगठनों, असामाजिक तत्वों द्वारा व्यवधान उत्पन्न कर आंदोलन को असफल करने का प्रयास किया गया। जिसके चलते दलित वर्ग के साथ मारपीट अत्याचार, तोडफोड और आगजनी की घटनाएं हुईं। मगर पुलिस द्वारा एससी-एसटी वर्ग के 2 हजार 862 व्यक्तियों को नामजद कर 630 लोगों को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया।
ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस द्वारा नामजद करने में गंभीर अनियमितता की गई। मृतक व्यक्तियों को, एक ही व्यक्ति को एक से अधिक जिले में तथा कॉलेज की परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों तक को आरोपी बना दिया गया जो कि किसी भी प्रकार से संभव ही नहीं है।
ये मंत्री-विधायक रहे मौजूद
ज्ञापन में बताया गया है कि दलित वर्ग के सरकारी कर्मचारी, अधिवक्ता, इंजीनियर, पत्रकार जो अपने कर्तव्य स्थल पर मौजूद थे उनको भी आरोपी बनाया गया। इससे स्पष्ट है कि निर्दोष व्यक्तियों को आरोपी बनाकर केस दर्ज किए गए हैं। इस दौरान मंत्री रमेशचंद मीना के साथ परसादीलाल मीना, टीकाराम जूली, ममता भूपेश, भजनलाल जाटव सहित एससी-एसटी वर्ग के कई विधायकगण मौजूद रहे। ( फाइल फोटो )
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Updated on:
01 Dec 2019 08:30 pm
Published on:
01 Dec 2019 08:18 pm
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