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चांद के खतरनाक इलाके में हैं चन्द्रयान-2 का लैंडर

चन्द्रयान-2 का लैंडर विक्रम चांद पर जिस हाल में है, और जहां पर फिलहाल वो है, उस इलाके को साइंटिस्ट बेहद खतरनाक बता रहे हैं। हमने चांद पर लैंडर को दक्षिणी ध्रुव पर भेजा लेकिन लैंडर की सॉफ्ट लैडिंग न होने की वजह से स्पेस एजेंसी से उसका सम्पर्क टूट गया।

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जयपुर

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Neeru Yadav

Sep 11, 2019

चांद के खतरनाक इलाके में हैं चन्द्रयान-2 का लैंडर

चांद के खतरनाक इलाके में हैं चन्द्रयान-2 का लैंडर

चन्द्रयान-2 का लैंडर विक्रम चांद पर जिस हाल में है, और जहां पर फिलहाल वो है, उस इलाके को साइंटिस्ट बेहद खतरनाक बता रहे हैं। हमने चांद पर लैंडर को दक्षिणी ध्रुव पर भेजा लेकिन लैंडर की सॉफ्ट लैडिंग न होने की वजह से स्पेस एजेंसी से उसका सम्पर्क टूट गया। हालांकि ऑर्बिटर ने विक्रम की लोकेशन तो पता कर ली, लेकिन सम्पर्क अभी तक नहीं हो सका है। उधर यूरोपियन स्पेस एजेंसी की एक रिपोर्ट की मानें तो जहां विक्रम लैंड हुआ है वह खतरनाक इलाका है। इस स्पेस एजेंसी ने खुद एक मिशन के लिए रिपोर्ट तैयार की थी हालांकि उनका मिशन तो पूरा नहीं हो सका लेकिन यह रिपोर्ट कई ऐसी सच्चाई उजागर कर रही है जो उस इलाके से जुड़ी हैं
आइये आपको बताते हैं कि विक्रम लैंडर चांद के जिस इलाके में है वो कितना खतरनाक है
चांद के इस हिस्से में जटिल पर्यावरण
लूनर लैंडर मिशन नाम का प्रोजेक्ट यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने तैयार किया था, लेकिन फंड्स के कमी के चलते यह ठंडे बस्ते में चला गया। इस मिशन में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर रिपोर्ट भी तैयार की गई थी। इसमें बताया गया है कि चांद के इस हिस्से में बेहद जटिल किस्म का पर्यावरण है, इसमें चार्ज पार्टिकल्स और रेडिएशन चांद की धूल में मिलते हैं. यहां नतीजे हैरान करने वाले, सोच से बाहर और खतरनाक हो सकते हैं
चांद की धूल से खतरा
यह रिपोर्ट बताती है कि चांद की धूल एक्विपमेंट से चिपककर मशीनें खराब कर सकती है, सोलर पैनल्स को ढक सकती है और एक्विपमेंट्स की कार्यक्षमता को गड़बड़ा सकती है। इसमें कहा गया है इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्सेज चांद पर धूल उड़ाती है जिससे खतरा हो सकता है। इन पार्टिकल्स से बनने वाले इलेक्ट्रोस्टेटिक चार्ज के कारण आगे जाने वाले लैंडर्स के लिए खतरा पैदा हो सकता है
17 तरह के रिस्क
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव में स्पेसक्राफ्ट लैंड कराने में 17 तरीके के रिस्क होते हैं। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ प्योर्टो रीको मयागेज ने नासा के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। लूनर एक्सप्लरेशन एंड एक्सेस को पोलर रीजन नाम की रिपोर्ट में चांद के इस हिस्से में लैडिंग के खतरों के बारे में बताया गया। यह रिपोर्ट नासा के 2024 तक चांद पर इंसान भेजने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।
सोलर पावर जनरेशन को खतरा
चांद की इस सतह पर लैंडिंग के दौरान लैंडर को ऐसी किसी भी छाया पर नजर ऱखनी पड़ती है जिससे सोलर पावर जनरेशन पर असर हो। साथ ही ढलान और बड़ी चट्टानों का भी ध्यान रखना होता जिससे लैंडर को रुकने के दौरान खतरा हो सकता है।