
जयपुर। राजधानी जयपुर का चौड़ा रास्ता ( chaura rasta ) किसी पहचान का मोहताज नहीं है। यह रास्ता शहर ही नहीं प्रदेशभर में किताबों के सबसे बड़े बाजार के रूप में अनूठी पहचान रखता है। यह सिलसिला वर्ष 1960 से शुरू हुआ, जो अभी तक बरकरार है। व्यापारियों के अनुसार, शुरु आती दौर में यहां तीन-चार दुकानें थीं। इसके बाद कुछ छोटे किताब विक्रेता फुटपाथ पर किताबे बेचनी शुरू की। धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई। बाजार की ख्याति में भी चार चांद लगते गए। ऐसी कोई पुस्तक नहीं जो राजस्थान में किसी स्कूल, कॉलेज में पढाई जाती हो और वह यहां मिले नहीं। इस वजह से यहां ना सिर्फ जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर, जैसलमेर समेत लगभग सभी जिलों से स्टूडेंट्स आवाजाही शुरू हो गई। यहां कई पब्लिकेशन हाउस है, जो कि कई जिलों में पुस्तक भेजते है। वर्तमान में यहां चार से पांच हजार स्टूडेंट्स किताबे खरीदने रोजाना आते है। यहीं वजह है कि चौड़ा रास्ता को अगर ज्ञान का मार्ग भी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बरसों से यह बाजार बढ़ता जा रहा है।
45 साल से जारी है सफर
पुस्तक विक्रेता कैलाश झालानी ने बताया कि 45 साल से इस पेशे से जुड़ा हूं। पुस्तकों के कारण बाजार को अलग पहचान मिली है। हमें भी बहुत अच्छा लगता है। शुरुआत में कुछ ही दुकानें थी, धीरे धीरे संख्या बढ़ गई। अब तो प्रदेशभर में यहां से पुस्तकें भेजी जाती है। पुस्तक विक्रेता राजकुमार ने बताया कि हमारी दुकान चौड़ा रास्ता में सबसे पुरानी दुकान में से एक है। यहां पहले फुटपाथ पर दुकानें लगती थी। धीरे-धीरे पक्की दुकानों में किताबों की बिक्री शुरू हो गई।
इनके लिए जाना जाता है यह मार्ग
यहां सवाई मान सिंह लाइब्रेरी भी है। जिसके चलते भी बड़ी तादाद में स्टूडेंट्स का यहां से खास जुड़ाव रहता है।
यहां पुरानी किताबें भी खरीदी और बेची जाती है।
किताब विक्रेता सेलेब्स में बदलाव आदि को लेकर अपडेट रहते है।
चौड़ा रास्ता में कई पब्लिशिंग हाउस भी है। इस वजह से
बड़ी तादाद में यहां प्रिंटिंग प्रेस भी है।
यहां अमूमन सभी प्रकार की पुस्तकों की बिक्री होती है।
एमएससी स्टूडेंट राखी शर्मा ने बताया कि चौड़ा रास्ता किताब व स्टेशनरी के सबसे परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यहां सब कु छ एक ही जगह मिल जाता है वो भी अपडेट। इस वजह से भटकना नहीं पड़ता है।
Updated on:
21 Nov 2019 02:26 pm
Published on:
21 Nov 2019 02:24 pm
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