
अश्विनी भदौरिया / जयपुर। चेतन सैनी की मौत का मामला जब ताजा था उस दौरान विभिन्न समाज के नेता, सामाजिक संगठन सहित तमाम लोग घर आते थे। बोलते थे कि हम सरकार से मुआवजा दिलाएंगें। परिवार की हर संभव मदद का विश्वास भी दिलाया था, लेकिन ढाई महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद अब यहां कोई नहीं आता। बड़ी-बड़ी बातें करने वाले वो बड़े लोग दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहीं देते हैं, क्योंकि अब मामला ठंडा जो पड़ गया है। यह उस परिवार के लोगों की दास्तां हैं, जिनके एक सदस्य की मौत गुत्थी बनकर रह गई। एफएसएल रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई, लेकिन ये मानने को तैयार नहीं है।
इंश्योरेंस क्लेम तक नहीं मिला
परिजनों का कहना है कि चेतन के आर्थिक सहायता करने की बात तो दूर रही एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद तो उसकी कराई इंश्योरेंस का क्लेम मिलने में मुश्किल आ रही है। 24 फरवरी को चेतन की मौत को तीन महीने हो जाएंगे। लेकिन अभी तक इंश्योरेंस का क्लेम नहीं मिल सका है।
चेतन को याद करते ही भर आती है आंखे
छोटे से कमरे में सास-ससुर और दोनों बच्चों के साथ बैठी चेतन सैनी की पत्नी निर्मला उर्फ नीतू आज भी यह मानने को तैयार नहीं है कि उसके पति ने आत्महत्या की है। चेतन सैनी के बारे में बात करने पर कमरे में बैठे हर किसी की आंखे भर आई। पत्नी नीतू उर्फ निर्मला का कहना है कि उसके पति चेतन पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके मौत से परिवार बिखर गया है। बेटी कोमल और बेटा यश की परवरिश की जिम्मेदारी उस पर आ गई है। ऐसे में कहीं से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाने से अब उसे ही अपने बच्चों की परवरिश करने के लिए कोई काम करना होगा।
24 नवम्बर का था मामला
गौरतलब है कि गत वर्ष 24 नवंबर की सुबह नाहरगढ़ किले की बाउंड्री वाल गण-गणेश मंदिर के झुमर कोने पर प्लास्टिक की रस्सी से चेतन सैनी की फंदा लगी लाश मिली थी। तथा घटनास्थल पर अलग-अलग जगहों पर पत्थरों और दीवार पर पद्मावती के खिलाफ विवादित लेख लिखे मिले थे।

Published on:
16 Feb 2018 10:11 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
