
child play
उन्हें प्रेरित करें
'रिवोल्यूशनरी न्यू साइंस ऑफ एक्सरसाइज एंड द ब्रेन' के लेखक डॉ. जॉन रेटली बताते हैं कि जो बच्चे पढ़ाई के साथ आउटडोर गेम्स में हिस्सा लेते हैं, उनका दिमाग तेज होता है। वे पूरी नींद लेते हैं, इसलिए आलसी नहीं होते। यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनुइस के मनोविज्ञान विभाग के अनुसार माता पिता को चाहिए कि वे बच्चों को आउटडोर गेम्स के लिए प्रेरित करें।
मस्तिष्क का विकास
सक्रिय व खेल में हिस्सा लेने वाले बच्चों को मस्तिष्क बीडीएनएफ प्रोटीन बनाता है। यह प्रोटीन नर्व कनेक्शन को मजबूत करता है। बच्चों के ये कनेक्शन सुगठित होते हैं। वे सीखने को उत्सुक व तत्पर होते हैं। ऐसे बच्चे सूचनाओं को तत्काल ग्रहण कर लेते हैं।
वे संघर्षशील होते हैं
खेलकूद बच्चों में सहनशक्ति और संघर्ष का भाव पैदा करता है। वे विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सीखते हैं। जीत के प्रति जी जान से जुटने से अपना लक्ष्य हासिल करने में वे माहिर हो जाते हैं। यही भावना उन्हें मुश्किल हालात में भी लडऩे की ताकत देती और बच्चा धैर्यवान बनता है। संघर्ष में डटे रहने का हौसला उनमें पैदा होता है।
मजबूत मसल्स
खेल मसल्स व हड्डियों को मजबूत करते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे बच्चों के ज्वाइंट्स फ्लेक्सीबल हो जाते हैं, जो बड़े होने पर उन्हें बोन व ज्वाइंट डिसऑर्डर जैसी परेशानी से बचाते हैं। यही वजह है कि खिलाडिय़ों का शरीर अन्य लोगों के मुकाबले लचीला होता है।
बढ़ती है टीम भावना
बच्चे जब किसी टीम का हिस्सा होते हैं तो वे अपने लिए नहीं, टीम के लिए खेलते हैं। इससे उनके बीच समूह में काम करने की भावना पनपती है, जो भविष्य में उनके करियर के लिए जरूरी है। खेल से वे सीखते हैं कि टीम के जरिए काम करने पर सफलता आसानी से हासिल की जा सकती है। एक दूसरे का सहयोग और एक दूसरे से सीखने का भाव भी उनमें पैदा होता है।
प्रतिरक्षा क्षमता
खेल बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। हवा, मिट्टी, पानी से सीधा संपर्क रहने से बच्चों की बैक्टीरिया से लडऩे की क्षमता बढ़ जाती है और वे कई सामान्य रोगों का मुकाबला कर लेते हैं। यह भी वजह है कि गांव के बच्चे शहरी बच्चों के मुकाबले ज्यादा सुदृढ़ होते हैं।
वे हष्टपुष्ट होते हैं
आउटडोर गेम खेलने वाले बच्चे दिखने में भी हष्टपुष्ट दिखते हैं। खेल की वजह से इन बच्चों का बदन सुगठित होता है। उनका लुक लुभाता है और वे बॉडी बैलेसिंग में दक्ष होते हैं। यही नहीं स्पोट्र्स मूलतया कार्डियो कसरत भी है। खेलकूद के कारण बच्चों का हृदय ब्लड पम्पिंग में दक्ष हो जाता है, जिससे फेफड़े ज्यादा मजबूत हो जाते हैं। इससे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं।
प्रतिस्पद्र्धा का भाव
आउटडोर खेलने वाले बच्चे प्रतिस्पद्र्धी होते हैं। वे जीतना व हारना सीख लेते हैं और भविष्य में अवसाद जैसे मानसिक रोग से बचते हैं। वे जान जाते हैं कि हर वक्त जीत ही नहीं होती हार भी हो जाती है। यह हार हमें सुधार करने का अवसर देती है। यही नजरिया उनका जिंदगी को लेकर भी बनता है।
Published on:
03 Dec 2018 06:31 pm
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