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बदल रही समाज की सोचः निसंतान दंपतियों के घर की रौनक बन रहीं गोद ली बेटियां

प्रदेश के शिशु गृहों में बेटों की अपेक्षा बेटियों को गोद लेने के लिए ज्यादा आवेदन आ रहे हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि लोगों की मानसिकता में परिवर्तन आ रहा है। बेटी गोद लेने की कतार में अमरीका, यूके, फ्रांस, जर्मनी, जापान सहित कई देशों के लोग शामिल हैं।

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कन्या भ्रूण हत्या और कचरे सहित झाड़ियों में नवजात बालिका मिलने के मामले आम हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे समाज की सोच बदल रही है। नि:संतान दंपती भी घर की रौनक बढ़ाने के लिए बेटी गोद ले रहे हैं। प्रदेश में बेटों की बजाय अब बेटियों को गोद लेने की चाह बढ़ रही है। स्थिति यह है कि दंपती बेटी गोद लेने के लिए दो से तीन साल का इंतजार कर रहे हैं। राजस्थान में पांच साल में 596 बच्चों को गोद लिए गए हैं, जिनमें 358 लड़कियां और 238 लड़के गोद लिए गए। पहले जहां सालभर में 5 से 6 बेटियां गोद ली जाती थी, वहीं यह संख्या बेटों से अधिक हो गई है।


बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया आसान
राजकीय शिशु गृह की अधीक्षक डॉ. आस्था शर्मा ने बताया कि बच्चा गोद लेने के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। नए दंपती भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। इसकी प्रक्रिया सरकार ने बहुत आसान कर दी है। बच्चा गोद लेने के लिए पहले कारा पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद जहां से बच्चा गोद लेना चाहते हैं, वहां ऑफलाइन दस्तावेज जमा करवाने होंगे। उसके बाद होम स्टडी रिपोर्ट बनती है। फिर वेटिंग लिस्ट शुरू होती है। बच्चा गोद लेने में दो वर्ष का समय लगता है।

सुरक्षित रूप से करें बच्चे का परित्याग
भारत सरकार ने बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के साथ ही क्रेडल केन्द्र बनाए थे, जहां माता-पिता अपने बच्चों को कचरे और झाडियों में फेंकने की जगह सुरक्षित रूप से परित्याग कर सकते हैं। यहां से बच्चे को सरकार अपने पास रख लेती है। वहां उसकी पूरी तरह देखभाल की जाती है। इस तरह के केन्द्र राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और कुछ डिस्पेंसरी में स्थापित किए गए हैं। यह एजेंसी पूरी तरह गोपनीय तरीके से काम करती है। इसमें आपकी पहचान उजागर नहीं होती है। राजस्थान में विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण की 35 एजेंसी के साथ क्रेडल केन्द्र काम कर रहा है।

तीन श्रेणियों के बच्चे आते हैं शिशु गृह
अनाथ बच्चे
जिन बच्चों को झाड़ियों में फेंक देते हैं
जो माता-पिता बच्चा नहीं रखना चाहते हैं, वे खुद यहां छोड़ देते हैं

शादी के कई वर्ष बाद भी जब हमारा आंगन सूना रहा तो मैंने और मेरे पति ने बच्चा गोद लेने की ठानी। कारा में आवेदन करने के बाद भी हमें दो से तीन साल इंतजार करना पड़ा। इसके बाद हमें झुंझुनूं से बेटी मिली। जब हमने गोद लिया तो वह महज पांच माह की थी और आज वह दो साल की हो चुकी है। मैं और मेरे पति बेहद खुश हैं। मेरी बेटी हम दोनों के जीवन की खुशी है।
सपना शर्मा, दुर्गापुरा

5 वर्ष में इतने लड़के और इतनी लड़कियां गईं गोद
देश में
वर्ष लड़के लड़कियां

2019 — 20 60 97

2020 — 21 41 82

2021 — 22 54 74

2022 — 23 46 56

2023 — 24 37 49

कुल 238 358

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विदेश में...

वर्ष लड़के लड़कियां

2019 — 20 06 12

2020 — 21 11 13

2021 — 22 07 07

2022 — 23 08 07

2023 — 24 04 04

कुल 36 43

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