
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (फाइल फोटो-पत्रिका)
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम ग्रामीण रोजगार और आजीविका के लिए उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। यह अधिनियम कांग्रेस के समय की मनरेगा की विफलताओं का अंत है।
सीएम भजनलाल शर्मा ने बुधवार को सीएमओ में पत्रकारों से कहा कि मनरेगा को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन कांग्रेस सरकार के कमजोर प्रशासन और भ्रष्टाचार के कारण यह अपने लक्ष्य को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सका। इसमें जनता के पैसे का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की गलत मंशा के चलते मनरेगा के तहत किए गए अधिकांश कार्य गांवों की समग्र विकास योजनाओं से नहीं जुड़ पाए। नए वीबी-जी राम जी अधिनियम में इन सभी कमियों को दूर किया गया है। अब सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
कांग्रेस इस सुधार को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है, जबकि यह सहकारी संघवाद का मॉडल है। राज्यों की 40 प्रतिशत भागीदारी से जवाबदेही बढ़ेगी। कांग्रेस की ओर से काम कम होने का भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि नए कानून से अब सुनियोजित ढंग से गांवों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से कार्य करवाए जाएंगे। पीएम गतिशक्ति से जुड़कर गांवों में पानी, स्थायी सड़कें और आवश्यक बुनियादी ढांचे के कार्य भी होंगे।
सीएम ने कहा कि कांग्रेस के भ्रामक और दुष्प्रचारपूर्ण आरोपों को बेनकाब करना आपकी और हमारी जिम्मेदारी है। हम सबको वीबी-जी राम जी अधिनियम की खूबियों को जनता तक पहुंचाना होगा।
सीएम ने कहा कि मनरेगा में फर्जी और डुप्लीकेट जॉब कार्ड, नकली लाभार्थी, मनगढ़ंत हाजिरी और मजदूरी भुगतान में अनियमितताओं की जांच पड़ताल के लिए कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं होने के कारण सोशल ऑडिट केवल औपचारिकता बनकर रह गई। प्रशासनिक व्यय की सीमा मात्र 6 प्रतिशत होने से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं हो पाता था। वहीं, बेरोजगारी भत्ता तथा देरी से भुगतान पर मुआवजे जैसे प्रावधान कागजों तक सीमित रह गए थे।
Updated on:
07 Jan 2026 06:45 pm
Published on:
07 Jan 2026 06:36 pm
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