
प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ
जयपुर। सर्द हवाएं सिर्फ कंपकंपाती नहीं, दिल‑दिमाग पर वार भी कर रही हैं। ठंड बढ़ने के साथ ही हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं। अकेले एसएमएस अस्पताल में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के केसों में डेढ़ से दोगुना तक वृद्धि दर्ज की गई है।
चिकित्सकों का कहना है कि इस बार ठंड ज्यादा तीव्र नहीं है, फिर भी आंकड़ों में तेजी से बढ़ोतरी चिंताजनक है। बड़ी संख्या ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों की है।
एसएमएस अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में सामान्यतः 500 से 600 मरीज रोजाना आते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से इसमें 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इमरजेंसी में पहले जहां रोजाना 10 से 15 हार्ट अटैक के मरीज आते थे, अब संख्या 20 से 25 तक पहुंच गई है।
इनमें से 50 फीसदी से अधिक मरीज गंभीर हालत में लाए जा रहे हैं। प्रतिदिन दो से तीन मरीज मृत अवस्था में अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल में रोज होने वाली एंजियोप्लास्टी की संख्या 15 से बढ़कर 20 तक पहुंच गई है।
न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी और इमरजेंसी में भी ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इमरजेंसी में सामान्यतः 8 से 10 स्ट्रोक के मरीज आते थे, जो बढ़कर 15 से 20 तक हो गए हैं। अधिकांश मरीजों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है, लेकिन काफी युवा भी शामिल हैं।
न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. त्रिलोचन श्रीवास्तव का कहना है कि सर्दी के मौसम में मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और ब्लड शुगर से ग्रस्त मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जितनी जल्दी मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाएगा, उतना ही जान बचने की संभावना बढ़ेगी। 35 वर्ष से अधिक उम्र के युवाओं की संख्या बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है।
-विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और खून गाढ़ा होने लगता है। जब खून ज्यादा गाढ़ा हो जाता है तो उसका प्रवाह धीमा पड़ने लगता है। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और डीप वेन थ्रोम्बोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
-ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाएं
-सुबह-सुबह ठंड में बाहर निकलने से बचें
-अचानक भारी एक्सरसाइज के बजाय हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, टहलें
-गर्म कपड़े पहने बिना घर से बाहर न निकलें
-खानपान पर ध्यान दें, हरी सब्जियों का सेवन करें
-नियमित दवाएं लेते रहें, बीच में न छोड़ें
-बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें
-धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
-धूप में समय बिताएं
-कई लोग लक्षण महसूस होने पर ईसीजी जांच करवाते हैं और रिपोर्ट सामान्य आने पर लापरवाह हो जाते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। यदि ईसीजी सामान्य आने के बाद भी कोई परेशानी महसूस हो रही हो तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें और ऑब्जरवेशन में रहें। खासकर युवाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
-डॉ. दीपक माहेश्वरी, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट व प्रिंसिपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
Published on:
28 Dec 2025 08:06 am
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