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जयपुर। प्रदेशभर के ऐसे विश्विविद्यालय जिनमें परीक्षा की सेमेस्टर प्रणाली लागू है उनमें शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए कॉलेजों में अतिरिक्त कक्षाएं लगाने से लेकर पूर्व के प्रश्नपत्रों तक को हल कराया जाएगा। कक्षाओं में भी विद्यार्थियों की पूरी मॉनिटरिंग की जाएगी, इस सबके पीछे बड़ा कारण है कॉलेज शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार करना।
इसके लिए कॉलेज आयुक्त आशुतोष ए.टी.पेडणेकर ने सभी सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल्स को पाबंद किया है कि वे नियमित कक्षाओं का निरीक्षण करें और कक्षाओं के संचालन की नियमित व्यवस्था करें। विश्वविद्यालयों के पिछले 10 साल के प्रश्नपत्रों को कक्षाओं में हल कराएं। गणित, अंग्रेजी, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, भूगोल आदि की अतिरिक्त कक्षाएं लगानी होंगी।
विद्यार्थियों से करें संवाद
कॉलेजों में संकाय सदस्यों को अब पढ़ाने के साथ ही विद्यार्थियों के साथ कक्षा में द्विपक्षीय संवाद करना होगा, जिससे पता चलेगा की शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाने वाले विद्यार्थियों के कितना समझा में आ रहा है। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास व भाषा कौशल की अभिव्यक्ति के लिए कक्षा में संवाद के माध्यम से अथवा अन्य तकनीक की सहायता से संबंधित विषयपरक अभिव्यक्ति का अवसर दें।
मॉडल उत्तर भी तैयार कराने होंगे
जिन सरकारी कॉलेजों में विश्वविद्यालय की सेमेस्टर प्रणाली लागू है वहां संकाय सदस्यों को अब विद्यार्थियों को विषय वस्तु समझाने के साथ ही उस बिंदु से संबंधित प्रश्न व उनके मॉडल उत्तर भी साझा करने होंगे। ऐसा करने से विद्यार्थियों में उत्तर लिखने की कला का विकास होगा।
नियमित टेस्ट लेने होंगे
विद्यार्थियों में गुणवत्ता विकास को बेहतर बनाने के लिए नियमित टेस्ट लेने होंगे। टेस्ट के बाद विद्यार्थियों को टेस्ट में पूछे गए प्रश्नों के उत्तरों की फोटो प्रतिलिपि उपलब्ध करानी होगी, जिससे विद्यार्थी प्रश्नों के उत्तर में कमी का आंकलन कर सकेंगे। कॉलेजों में परीक्षा पूर्व अवकाश शुरू होने से पहले विद्यार्थियों की अकादमिक समस्याओं के समाधान के लिए संकाय सदस्यों से सहायता ली जाएगी, विद्यार्थियों की हरसंभव मदद की कोशिश कॉलेजों की तरफ से की जाएगी।

Published on:
12 Apr 2018 11:13 am
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