
जयपुर . चुनावी साल में भूमाफिया ने शहर और उसके आस-पास के इलाकों में सरकारी जमीनों पर नजरें गड़ा दी हैं। ऐसा ही बड़ा मामला दिल्ली रोड, गलता गेट से आगे लाल डूंगरी के पास स्थित जमीन का सामने आया है। यहां से गुजर रहे नाले से सटी करीब 15 बीघा से ज्यादा सरकारी बेशकीमती जमीन पर कॉलोनी सृजित कर दी गई।
कब्जा करने वालों ने तो कई भूखंड बेच दिए, जहां निर्माण भी हो गया है। यहीं, एक जगह बिना नक्शा स्वीकृति के ही अवैध कॉलोनी बसाने का काम चल रहा है। जबकि, हाईकोर्ट की रोक के कारण अनुमति मिल ही नहीं सकती। लोगों को ठगने के लिए जेडीए कर्मचारी-अधिकारियों से भी सांठगांठ कर ली गई।
पूर्व पार्षद की भी भूमिका संदिग्ध
अवैध तरीके से कॉलोनी सृजित करने के खेल में एक पूर्व पार्षद की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक जेडीए अफसरों से सांठगांठ कर पहले तो नाले को पक्का कराने का काम हुआ। फिर इससे सटी बची जमीन पर कॉलोनी सृजित की गई। यहां तक कि इसके लिए सीमेंट-कंकीट की सड़क भी बना दी गई।
किया भ्रमित
कुछ लोग जेडीए में इसकी जानकारी लेने आए तो कर्मचारियों ने अनुमोदित योजना बता दिया। जबकि, खुद उपायुक्त ने इसे गलत बताया है। वर्तमान में इस जमीन का बाजार भाव 25 करोड़ रुपए से ज्यादा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी है लेकिन चुनावी साल में जमीनों के गोरखधंधे की अमरबेल को बढ़ाने से रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। अब्दुल रहमान बनाम सरकार के केस में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से बहाव क्षेत्र को मेंटेन करने और वहां किसी तरह का निर्माण नहीं होने देने का आदेश दे रखा है।
यह है स्थिति
(1) जेडीए खातेदारी जमीन-राजस्व ग्राम बदनपुरा में खसरा संख्या 516, 517 व 507 में 7 बीघा 16 बिस्वा भूमि। यहां भूखंड सृजित किए गए, कई जगह मकान भी बना लिए।
(2) वन विभाग खातेदारी जमीन-खसरा संख्या 511 व 512 भूमि, जिसका क्षेत्रफल करीब 5 बीघा है। यहां भी अवैध कॉलोनी सृजित कर दी गई। निर्माण कार्य चल रहा है।
(3) खसरा संख्या 513, 514 व 515 निजी खातेदारी भूमि। 90ए भी नहीं हुई है। नक्शा स्वीकृति पर हाईकोर्ट की रोक है। इसके बावजूद भूखंड बेच चांदी कूट ली।
(4) खसरा संख्या 504, 505, 506 व 508 निजी खातेदारी की भूमि है। इसकी 90ए की कार्यवाही हुई लेकिन नक्शा अनुमोदन पर हाईकोर्ट की रोक। इसके बावजूद न केवल अवैध तरीके से सुंदर नगर कॉलोनी सृजित कर भूखंड बेचने का खेल चल रहा है। इसी में सरकारी जमीन का खसरा संख्या 507 को भी शामिल कर लिया गया।
Published on:
07 Mar 2018 12:22 pm
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