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राजस्थान के ‘जघन्य’ गैंगरेप कांड की दिल्ली में गूंज, जानें कांग्रेस कैसे हो रही BJP पर हमलावर? 

राजस्थान के अजमेर जिले में एक 15 वर्षीय दलित बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और उसके परिवार पर हुए बर्बर हमले की गूँज अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता कर सीधे तौर पर राजस्थान की भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है।

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राजस्थान के अजमेर में जुलाई 2024 में एक नाबालिग दलित बच्ची के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने राजस्थान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलितों पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय उन्हें 'शांति भंग' जैसी मामूली धाराओं में छोड़ रही है।

वो खौफनाक मंजर, 'गर्भवती' होने पर हुआ खुलासा

मामला अजमेर का है, जहाँ जुलाई 2024 में तीन दरिंदों ने 15 वर्षीय बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार किया। आरोपियों ने परिवार को जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने पर मजबूर किया। इस जघन्य अपराध का खुलासा तब हुआ जब बच्ची गर्भवती हो गई।

  • जीरो FIR का सहारा: पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दिल्ली में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करानी पड़ी, जिसके बाद केस को अजमेर ट्रांसफर किया गया।

बयान के 8 महीने बाद भी गिरफ्तारी नहीं

राजेंद्र पाल गौतम ने पुलिस की लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के बयान दर्ज होने के 8 महीने बाद तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

  • अपराधियों को 'राहत': तीन में से केवल एक आरोपी पकड़ा गया, जबकि बाकी दो को पुलिस ने महज शांति भंग की धारा में छोड़ दिया। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि "पीड़िता का बयान दर्ज होने के बावजूद बलात्कारियों को छोड़ने की पुलिस की हिम्मत कैसे हुई?"

'गवाही' से पहले खूनी खेल

मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ 16 मार्च को आया। 17 मार्च को पीड़िता का कोर्ट में बयान होना था, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले आरोपियों के परिवार ने समझौते का दबाव बनाया।

  • जानलेवा हमला: जब परिवार ने झुकने से मना किया, तो आरोपियों ने पीड़िता के पिता, चाचा और चाची पर कुल्हाड़ियों से जानलेवा हमला कर दिया।
  • झूठी FIR: परिवार को दबाने के लिए उनके खिलाफ एक झूठी एफआईआर भी दर्ज कराई गई, जिसे बाद में पुलिस ने जांच के बाद बंद कर दिया।

दलितों की स्थिति, जारी किए सरकारी आँकड़े

कांग्रेस नेता ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा शासित राज्यों को घेरा। उन्होंने बताया कि:

  • देश में दलित उत्पीड़न के 76 प्रतिशत मामले केवल 5 भाजपा शासित राज्यों में हो रहे हैं।
  • इन मामलों में उत्तर प्रदेश पहले, मध्य प्रदेश दूसरे और राजस्थान तीसरे स्थान पर है।
  • कांग्रेस का आरोप है कि राजस्थान में दलित समुदाय को न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही उन्हें अपनी फसल काटने दी जा रही है।

'सरकार की जिम्मेदारी, लेकिन सुरक्षा नदारद'

कांग्रेस ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को तुरंत सुरक्षा दी जाए और उन पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जिन्होंने बलात्कार के आरोपियों को खुला छोड़ दिया। गौतम ने जोर देकर कहा कि पीड़िता को संरक्षण देना सरकार की जिम्मेदारी थी, लेकिन उसे बयान दर्ज कराने के लिए भी सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई।