
जयपुर। विधानसभा चुनाव में महिलाओं को अधिक से अधिक देने के कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं, पार्टी नेतृत्व की ओर से बार-बार महिलाओं को अधिक से अधिक टिकट देने की बात कही जा रही थी, लेकिन कांग्रेस की चारों सूचियां आने के बाद ये दावे खोखले ही साबित हुए। कांग्रेस ने महज 26 महिलाओं को ही टिकट दिया है। हालांकि 2013 के मुकाबले अबकी बार दो टिकट ज्यादा दिए गए हैं।
पार्टी के आला नेताओं के इस फैसले की अंदरखाने खासकर महिला नेताओं के बीच खासी चर्चा हो रही है कि आखिर ज्यादा प्रतिनिधित्व देने के राहुल गांधी के आदेशों की पालना क्यों नहीं की गई। बताया जाता है कि महिलाओं को कम टिकट देने के मामले को लेकर प्रदेश की महिला नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के समक्ष विरोध भी दर्ज कराया है। हैरत की बात तो यही रही कि पार्टी नेतृत्व ने महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष रेहाना रियाज को भी टिकट नहीं दिया, जबकि उन्हें चूरू से प्रबल दावेदार मानी जा रही थी।
40 टिकट देने के किए थे दावे
विधानसभा चुनाव में इस बार में महिलाओं को 40 टिकट देने के दावे किए जा रहे थे। इसके लिए एक फॉर्मूला भी तैयार किया जा गया था कि पार्टी हर जिले से एक महिला को टिकट देगी। कांग्रेस संगठन में 39 जिले आते हैं इस लिहाज से पार्टी 40 टिकट देने की बात कर रही थी। इसी के चलते इस बार कांग्रेस में बड़ी संख्या में महिला नेताओं के टिकट के लिए दावेदारी जताई थी, महिलाओं के नामों पर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकों में चर्चा भी हुई थी, इसके बावजूद महिलाओं को कम प्रतिनिधित्व दिया गया।
वहीं जिन महिलाओं को टिकट दिए गए हैं, उनमें आधा दर्जन से ज्यादा महिलाएं तो वो जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है। औसियां से महिपाल मदरेणा की पुत्री दिव्या मदरेणा, रामगढ़ अलवर से जुबेर खान की पत्नी साफिया खान और लाडपुरा से नईमुद्दीन गुड्डु की पत्नी को पार्टी ने टिकट दिया है।
सार्वजनिक मंचों से की थी राहुल ने घोषणा
बता दें कि राहुल गांधी ने डूंगरपुर के सागवाड़ा, बीकानेर और चूरू रैली में महिलाओं को अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात की थी। सागवाड़ा रैली में तो राहुल ने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे का नाम लेते हुए कहा था कि अगर महिलाओं को कम टिकट दिए गए तो वे प्रत्याशियों की सूची को मंजूरी नहीं देंगे।