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World environmental health day: प्लास्टिक का दंश भुगत रहा पर्यावरण… राजस्थान में सरकार ने नियम सख्त किए तो थैलियों की तस्करी शुरू

world environmental health day:जयपुर स्थित हिंगोनिया गौशाला में हजारों गायें हैं, इनमे हर महीने दर्जनों गायों की मौत हो रही है। उनके पेट से बड़ी मात्रा में पॉलीथिन निकल रही है।

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world environmental health day: आज विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस है। पर्यावरण के स्वास्थ्य को लेकर आज सरकार और अन्य सामाजिक संस्थाएं एक दिन की चिंता करेंगी कि पर्यावरण खराब हो रहा है। लेकिन आम आदमी जिसका पर्यावरण खराब करने में बहुत बड़ा योगदान है उसे तो यह पता तक नहीं कि आज विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस है। पर्यावरण को खराब करने के लिए जो सबसे ज्यादा जिम्मेदार है वह प्लास्टिक है। सालों से इससे मुक्ति पाने की योजनाएं बन रही हैं लेकिन इनमें से अधिकतर योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आ पा रही हैं। राजस्थ्ज्ञान सरकार ने पॉलीथिन और कैरीबेग में यूज होने वाले प्लास्टिक को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए हैं, लेकिन उसके बाद अब नया चलन शुरू हो गया है। जब तस्करी के जरिए सस्ती पॉलिथीन और कैरीबेग अन्य राज्यों से मंगाए जा रहे हैं, वह भी चोरी छुपे यानि तस्करी के जरिए......।

38 फैक्ट्रियां बंद कर दी गई, फिर भी फर्क नहीं पड़ रहा..... अब तस्करी के जरिए आ रही पॉलीथिन
पर्यावरण के लिए सबसे नुकसानदायक कुछ है तो वह पॉलीथिन है। यह छोटे छोटे बच्चों तक को पता है, लेकिन उसके बाद भी प्रयोग जारी है। साल 2021 और 2022 में राजस्थान के अलग अलग जिलों में निगमों और निकायों के द्वारा चार लाख पंद्रह हजार किलो से भी ज्यादा पॉलीथिन जब्त की जा चुकी है। इस साल यह संख्या और भी ज्यादा बताई जा रही है। लेकिन उसके बाद भी प्रयोग जारी है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियत्रंण मंडल के अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में पॉलीथिन बनाने वाली कई ईकाईयां बंद कर दी गई हैं। पिछले कुछ सालों में 38 फैक्ट्रियों में काम बंद कराया गया है और उनमंें से कुछ को तो पूरी तरह से सील कर दिया गया है। लेकिन उसके बाद भी कई राज्यों से पॉलीथिन चोरी छुपे आ रही है। विभाग के अफसरों की मानें तो यूपी, बिहार, पंजाब, एमपी और आसपास के राज्यों से तस्करी कर अवैध तरीके से पॉलीथिन लाई जा रही है।

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पॉलीथिन से एक नहीं दो नुकसान..... पर्यावरण को सत्यानाश और गौमाता की मौत
पॉलीथिन गलती नहीं है, नष्ट नहीं होती है, जहां मिट्टी में दबती है वहां से कई सालों के बाद भी वैसे के वैसे ही निकल आती है। यह सभी को पता है लेकिन उसके बाद भी हम मानने को तैयार नहीं हैं। पर्यावरण के सत्यानाश के लिए हम सभी जिम्मेदार है। प्रयोग से एक नहीं दो नुकसान हो रहे हैं। पहला तो पर्यावरण हमेशा के लिए खराब हो रहा है और दूसरा जो उससे भी बड़ा है कि हर साल हजारों गायों की मौत पॉलीथिन खाने से हो रही है। साल 2012 की पशु गणना और साल 2019 की पशु गणना की तुलना की जाए तो इसमें एक लाख 29 हजार 500 से भी ज्यादा गौवंश कम हो गया। इनमें से अधिकतर की मौत पॉलीथिन खाने से हो रही है। जयपुर स्थित हिंगोनिया गौशाला में हजारों गायें हैं, इनमे हर महीने दर्जनों गायों की मौत हो रही है। उनके पेट से बड़ी मात्रा में पॉलीथिन निकल रही है।