25 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

आम आदमी को बड़ा झटका, जीरे ने बिगाड़ा खाने का स्वाद, ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचे दाम

महंगे रसोई गैस सिलेंडर और आटे के बाद अब महंगे मसालों ने आम आदमी को झटका दिया है।
1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Narendra Singh Solanki

•

Updated: 18 Apr 2023, 10:35 AM IST

आम आदमी को बड़ा झटका, जीरे ने बिगाड़ा खाने का स्वाद, ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचे दाम

आम आदमी को बड़ा झटका, जीरे ने बिगाड़ा खाने का स्वाद, ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचे दाम

महंगे रसोई गैस सिलेंडर और आटे के बाद अब महंगे मसालों ने आम आदमी को झटका दिया है। बेमौसमी बारिश ने जीरे के दामों में ऐसी तेजी ला दी की, गरीब की थाली से जीरा कम नहीं गायब ही हो गया। 250 रुपए बिकने वाला जीरा अब 500 रुपए किलो पर पहुंच गया है। उत्पादक मंडियों में तो जीरे के दाम 50,000 रुपए क्विंटल के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए हैं। जीरे के दाम में एक दिन में 9000 रुपए क्विंटल तक उछल चुके है।

यह भी पढ़ें : राजस्थान सरकार ने बनाया इतिहास, 1321 करोड़ का राजस्व किया हासिल

कम उत्पादन के कारण बढ़े हैं दाम

राजस्थान में मार्च के दौरान बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण जीरे की फसल बड़े पैमाने पर खराब हुई थी। देश में सबसे ज्यादा जीरा उत्पादन राजस्थान और गुजरात में ही होता है। गुजरात में भी बारिश का असर फसल पर पड़ा। इसके चलते दोनों ही राज्यों में जीरा उत्पादन उम्मीद से कम हुआ है। कम उत्पादन के बावजूद जीरे की मांग पहले से ज्यादा बढ़ रही है। इसके चलते ही दाम अचानक तेजी से बढ़े हैं।

यह भी पढ़ें : बंपर पैदावार के बावजूद मूंगफली तेल में उछाल, निर्यात रोकने के लिए व्यापारियों ने उठाई मांग

किसानों का रुझान जीरे की बजाय सरसों पर

मसाला कारोबारी रामअवतार अग्रवाल का कहना है कि गर्मी के कारण जीरा की बुवाई का रकबा घटा है। नवंबर-दिसंबर में गर्मी के कारण तापमान ज्यादा होने से किसानों ने जीरे की बजाय सरसों की फसल की बुवाई ज्यादा की। पहले से ही कम रकबे के बाद इस फसल पर इस बार के अप्रत्याशित मौसम का भी असर पड़ा है। देश में 85 लाख टन जीरे का उत्पादन होता था, जोकि पिछले दो सालों से 50 से 55 लाख टन के बीच सीमट कर रह गया है।