
Ashok Gehlot vs Sachin Pilot
Ashok Gehlot vs Sachin Pilot: ये आज की बात नहीं है जब सीएम अशोक गहलोत बनाम पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का विवाद सुर्खियां बना हुआ है। दोनों नेताओं के बीच पिछले चार सालों से खींचतान चली आ रही है। और मजे की बात तो यह है कि इसका सीधा असर कांग्रेस पार्टी और कार्यकर्ताओं पर तो पड़ ही रहा है, कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान के प्रभारियों के लिए भी यह पद कांटों का ताज बन गया है।
राजस्थान के सीएम और पूर्व डिप्टी सीएम की सड़क तक पहुंचने वाली राजनीतिक कुश्ति का सबसे ज्यादा असर राजस्थान कांग्रेस प्रभारियों पर दिखाई देता है। इसका सीधा उदाहरण मल्लिकार्जुन खरगे भी हैं जो दोनों के बीच हो चुके विवाद के साक्षी हैं। मामला करीब 6 महीने पुराना है जब कांग्रेस हाईकमान ने मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन को प्रभारी बनाकर राजस्थान भेजा था। जिम्मेदारी थी, लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच चल रहे विवाद का निपटारा हो सके। लेकिन हुआ वही जिसका अंदेशा था और सीएम आवास पर प्रभारियों द्वारा बुलाई गई बैठक में गहलोत समर्थक नहीं पहुंचे। इस दौरान कई विधायकों के इस्तीफे भी हुए और प्रभारियों को खाली हाथ लौटना पड़ा था।
कांग्रेस प्रभारी फिर रहे खाली हाथ
सीधी सी बात है, राजस्थान में नेताओं के आपसी कलह को निपटाने के लिए कांग्रेस प्रभारी कई दफा कोशिश कर चुके हैं लेकिन न मेल मिलाप न किसी दबाव से काम चल पाया है। आखिर में प्रभारियों का निर्णय किसी मकाम पर नहीं पहुंच सका है। इस बार भी कांग्रेस आलाकमान से धरना नहीं करने के संकेत के बावजूद सचिन पायलट ने धरना दिया तो प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने स्पष्ट कहा था कि पायलट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
चार साल से चल रही है खींचतान
दोनों के बीच ये मामला 2020 से चला आ रहा है जब अविनाश पांडे को पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजा गया था। उस समय सचिन पायलट और उनके समर्थित विधायक 19 विधायक मानेसर में पहुंच गए थे। इसके बाद 14 अगस्त 2020 को गहलोत सरकार को सदन में बहुमत साबित करना पड़ा था। इस दौरान पांडे पर आरोप लगाया गया कि वे गहलोत को समर्थन दे रहे हैं, आखिर 16 अगस्त को अविनाश पांडे को प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया गया।
अजय माकन पर भी पायलट समर्थन के लगे आरोप
अजय माकन कांग्रेस प्रभारी बने तो लगा कि राजस्थान के दोनों नेताओं में मतभेद खत्म हो गए हैं। इस दौरान कई सभाओं में गहलोत और पायलट साथ भी दिखे लेकिन इस सियासी खेल में मकान को भी इस्तीफा देकर पद छोड़ना पड़ा। उन पर आरोप भी लगे कि वह पायलट को समर्थन दे रहे हैं।
इससे पूर्व जब खरगे और माकन को प्रभारी बनाकर राजस्थान भेजा गया था और विधायक दल की मीटिंग बुलाई गई थी। लेकिन खुद सीएम अशोक गहलोत आवश्यक कार्य के चलते जयपुर से बाहर चले गए थे। इसकी वजह से 29 सितंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिल्ली जाकर माफी तक मांगनी पड़ी थी। इसी दौरान गहलोत गुट के विधायक शांति धारीवाल ने सचिन पायलट को सीएम बनाने में मकान का नाम लेकर आरोप तक लगा दिए थे। इसके बाद उनको अपना इस्तीफा देना पड़ा था।
Updated on:
15 Apr 2023 07:43 am
Published on:
15 Apr 2023 12:51 am
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