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अमायरा आत्महत्या मामला: स्कूल पर कार्रवाई या 5500 बच्चों को सजा? CBSE के फैसले से अभिभावक परेशान

राजधानी जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा की आत्महत्या के बाद सीबीएसई द्वारा मान्यता रद्द किए जाने पर स्कूल संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि स्कूल की गलती की सजा 5500 बच्चों को दी जा रही है। अभिभावक भी फैसले से चिंतित हैं।

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जयपुर

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Arvind Rao

Jan 01, 2026

Amayra Suicide Case

Amayra Suicide Case (Patrika Photo)

Amyra suicide case: जयपुर: नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा के आत्महत्या मामले में सीबीएसई की ओर से स्कूल की मान्यता रद्द करने के निर्णय पर अब स्कूल संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। निजी स्कूलों के संगठन सीबीएसई के फैसले के विरोध में आ गए हैं।

स्कूल संगठनों ने मान्यता रद्द करने के आदेश को वापस लेने की मांग की है। इधर, सीबीएसई की ओर लिए गए निर्णय से अभिभावक चिंता में हैं। अभिभावकों का तर्क है कि आत्महत्या करने वाली छात्रा के प्रति गहरी संवेदना है। लेकिन स्कूल की गलती की सजा 5500 बच्चों को क्यों दी जा रही है। स्कूल के दूसरे बच्चों का क्या कसूर है। इधर, शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रशासन को छह जनवरी को तलब किया है।

अभिभावक : दूसरे बच्चों के लिए होंगी मुश्किल

निमिश भूटानी का बेटा नौवीं में पढ़ रहा है। उनका कहना है कि स्कूल में जो घटना हुई उस पर एक्शन लिया जाना चाहिए। लेकिन सीबीएसई ने स्कूल पर जो एक्शन लिया है, उसका असर सभी बच्चों पर पड़ रहा है।

सीबीएसई को स्कूल को पाबंद करना चाहिए, नियम-कायदे और सुरक्षा मापदंडों को पूरा कराना चाहिए। अभिभावकों को जाागरूक करना चाहिए। लेकिन मान्यता रद्द करने के निर्णय से अन्य बच्चों को खमियाजा उठाना पड़ रहा है। इससे प्रतिभाशाली बच्चे पीछे रह जाएंगे। प्रवेश के लिए स्कूलों में भटकना पड़ेगा।

स्कूल संगठन : दबाव में लिया प्रशासनिक फैसला

स्कूल संगठनों ने कहा कि एक दुखद घटना को आधार बनाकर किसी स्कूल की सीबीएसई मान्यता रद्द करना न्याय नहीं बल्कि भावनात्मक दबाव में लिया प्रशासनिक फैसला है। कानून हादसे और लापरवाही में स्पष्ट अंतर करता है।

स्कूल क्रांति संगठन की प्रदेशाध्यक्ष हेमलता शर्मा ने कहा कि झालावाड़ में सरकारी स्कूल में छत गिरने से 7 बच्चों की मृत्यु हुई, तब किसी की मान्यता रद्द नहीं हुई। यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो कार्रवाई भी समान होनी चाहिए।

सीबीएसई का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा की रक्षा करना है, न कि हजारों बच्चों का भविष्य एक झटके में खत्म कर देना। यदि हर हादसे पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी तो देश का कोई भी स्कूल सुरक्षित नहीं रहेगा।

ये भी होंगे प्रभावित

स्कूल में सैकड़ों शिक्षक, कर्मचारी, बस चालक, परिचालक जुड़े हैं, ये सभी बेरोजगार हो जाएंगे। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे दूसरे स्कूल जाएंगे। वे मानसिक रूप से प्रभावित होंगे। अभिभावक बच्चों को लेकर 12 वीं तक निश्चिंत थे, उन्हें फिर से स्कूल की तलाश शुरू करना होगी। कई अभिभावक स्कूल के हिसाब से निवास तय करते हैं, अब बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने से दिक्कत होगी।

एक्शन के बाद दूसरे निजी स्कूल भी अलर्ट मोड पर

सीबीएसई की ओर से नीरजा मोदी स्कूल पर लिए एक्शन ने शहर के अन्य स्कूलों को भी अलर्ट कर दिया है। सवाल यह उठता है कि सीबीएसई ने जिन नियमों के तहत स्कूल की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया है क्या अन्य स्कूल उन नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में अब दूसरे स्कूलों में भी सुरक्षा और नियमों की पालना को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब दूसरे स्कूलों को भी बच्चों की सुरक्षा देखते हुए सीबीएसई के मापदंड को पूरा करना होगा।

सवाल: क्या हादसे का इंतजार कर रहे थे

स्वयंसेवा शिक्षण संस्था संघ राजस्थान के अध्यक्ष एलसी भारतीय ने कहा कि सीबीएसई छात्रा की मौत के बाद मापदंडों की बात कर रहा है। सीबीएसई की ओर से जब संबद्धता जारी की जाती है तब स्कूल में सुरक्षा मापदंडों की जांच क्यों नहीं की गई। इतना ही नहीं, सीबीएसई और शिक्षा विभाग की टीम ने कभी स्कूल में आकर निरीक्षण क्यों नहीं किया। सवाल उठता है कि क्या सीबीएसई और शिक्षा विभाग स्कूल में हादसे का इंतजार कर रहे थे। उन्हाेंने बताया कि स्कूल संगठनों की बैठक में इस फैसले का विरोध किया गया और इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी गई।

सीबीएसई की ओर से लिया निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है और विशेष रूप से कक्षा नवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए बेहद कठोर है, क्योंकि वे अपने करियर के महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। हम अपने विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं और दिशानिर्देशों के अनुसार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। भविष्य में, हमारी एकमात्र प्राथमिकता हमारे विद्यार्थी ही रहेंगे और हम उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
इंदु दुबे, प्रिंसिपल, नीरजा मोदी स्कूल