
Datta Purnima Dattatreya Purnima Aghan Purnima Margashirsha Purnima
जयपुर. साल 2020 के अंतिम दिन यानि 31 दिसंबर से सनातन धर्म का नया मास पौष मास शुरू होगा। यह माह सूर्य पूजा के लिए विख्यात है। इससे पहले मार्गशीर्ष यानि अगहन माह की पूर्णिमा आएगी जिसका विशेष महत्व बताया गया है। मार्गशीर्ष यानि अगहन माह की पूर्णिमा को दत्त पूर्णिमा भी कहते हैं।
यह पूर्णिमा इसलिए अहम है क्योंकि इस दिन त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश की सम्मिलित रूप से पूजा की जाती है। हालांकि इस तिथि पर इस बार मतभिन्नता सामने आ रही है। अगहन पूर्णिमा इस बार दो दिन मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 29 दिसंबर यानि मंगलवार को प्रारंभ होगी पर पूर्णिमा उदया तिथि 30 दिसंबर यानि बुधवार को रहेगी।
ऐसे में दत्त पूर्णिमा 29 दिसंबर को मनाई जाएगी जबकि स्नान-दान पूर्णिमा 30 दिसंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि दत्त भगवान अर्थात दत्तात्रेयजी को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त अवतार माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय अगहन पूर्णिमा के दिन ही प्रकट हुए थे इसलिए उनकी खासतौर पर पूजा का विधान है।
अगहन पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने की भी परंपरा है. इस दिन जरूरतमंदों को दान देने का कई गुना फल बताया गया है. पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने का सबसे ज्यादा महत्व है। भगवान सत्यनारायण की कथा में केले और हलवे का भोग लगाया जाता है। इस दिन किसी भी हाल में झूठ न बोलें।
ज्योतिषाचार्य पंडित एमकुमार शर्मा के अनुसार अगहन पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें. इसके बाद दत्त भगवान की विधि विधान से पूजा करें और मंत्रों का जाप करें। इस दिन शिवाभिषेक जरूर करें और शिवलिंग पर बिल्व पत्र व धतूरा चढ़ाएं। ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप भी करें। जरूरतमंदों को धन, जीवनोपयोगी वस्तुओं या अनाज का दान करें।
Published on:
26 Dec 2020 03:43 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
