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घूस का गणितः हर एक किमी पर एक लाख रुपए की बंधी, सात माह पहले शुरू हुआ खेल

दौसा में पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए एसडीएम पुष्कर मित्तल व दस लाख रुपए मांगने वाली एसडीएम पिंकी मीणा ने रिश्वत तय करना का गजब तरीका इजाद किया था। उन्होंने निर्माण कम्पनी रुपए की रिश्वत तय कर रखी थी।

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dausa corruption: pinki meena pushkar mittal manish agarwal

जयपुर। दौसा में पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए एसडीएम पुष्कर मित्तल व दस लाख रुपए मांगने वाली एसडीएम पिंकी मीणा ने रिश्वत तय करना का गजब तरीका इजाद किया था। उन्होंने निर्माण कम्पनी रुपए की रिश्वत तय कर रखी थी। कम्पनी ने जब रिश्वत नहीं दी तो एसडीएम मित्तल व पिंकी मीना ने हाईवे के लिए भूमि अवाप्त करने की प्रक्रिया धीमी कर दी। किसानों को भूमि का मुआवजा देने बंद कर दिया। ऐसे में किसानों के विरोध की आशंका हो गई। जब कम्पनी ने सम्पर्क किया तो आरोपी अधिकारियों ने उलटा कम्पनी को कानून व्यवस्था बिगड़ने की धमकी दे डाली। इतना ही नहीं एसडीएम मित्तल ने 15 दिसम्बर को ही कम्पनी के खिलाफ एसपी मनीष अग्रवाल को शिकायत की थी।

हर काम की रेट तय, कई थानाधिकारी भी घेरे में
एसीबी जांच में ये भी खुलासा हुआ कि दौसा के तत्कालीन एसपी मनीष अग्रवाल का दलाल नीरज मीना एसपी के काफी नजदीक था और हर काम के रुपए लेता था लोग अपने काम निकालने के लिए दलाल से सम्पर्क करते थे, वहीं पुलिसकर्मी अपने तबादलों व विभागीय कार्रवाई से निजात पाने के लिए दलाल को ही पकड़ते थे। निलम्बन की बहाली हो या थानाधिकारी का पद पाना हो, हर काम की दर भी तय थी।

पिंकी बोली: अभी सीएम की वीसी में व्यस्त हूं, करोड़ों का काम कर रहे हो, 10 लाख तो देने ही पड़ेंगे

बोलाः मेरा ध्यान रखना
एसीबी ने जब दलाल को रडार पर लिया तब भी वह कई लोगों से बात कर रहा था। उसने 30 दिसम्बर को ही नांगल राजावतान थानाधिकारी कृष्णकुमार मीणा से बात की थी। बातचीत में स्पष्ट रुप से कृष्णा कुमार ने दलाल से उनका ध्यान रखने के लिए कहा। कई पुलिसकर्मी उससे सम्पर्क में थे। कई ऐसी बातचीत एसीबी के पास हैं।

रिश्वत नहीं दी तो रोजाना दस चालान
एसपी ने कम्पनी से 10 लाख रुपए बंधी मांगी। फिर दलाल नीरज मीना को आगे किया जिसने चार लाख में सौदा तय किया। कम्पनी ने यह रकम भी नहीं दी तो दबाव बनाने के लिए कम्पनी के वाहनों के रोज 10 चालान किए जाने लगे। बांदीकुई थाने में एफआइआर दर्ज करा दी गई।

सात माह पहले शुरू हुआ खेल
हाईवे का निर्माण करीब सात माह पहले शुरू हुआ था। तभी से ये तमाम अधिकारी कम्पनी पर दबाव बनाने में जुटे थे। दलाल नीरज ने गत सात माह के भी 28 लाख रुपए मांगे थे। एसपी ने 23 दिसम्बर को ही जिले के सभी थानाधिकारियों को पत्र लिखा था कि कम्पनी पत्थर व मिट्टी का अवैध परिवहन कर रही है। आदेश में दौसा एसडीएम पुष्कर के 15 दिसम्बर के पत्र का हवाला भी था। इस पर पुलिस ने कम्पनी के कई डम्पर जब्त किए।

डीजीपी की नाराजगी के बाद भी तबादला नहीं
आइपीएस मनीष अग्रवाल की कार्यशैली से उच्चधिकारी भी परेशान थे। तत्कालीन डीजीपी भूपेन्द्र यादव ने न केवल एसपी को फटकार लगाई, बल्कि कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विभागीय पत्र लिखा था।

पीड़ित से बन गया दलाल
एसीबी ने बताया कि दलाल नीरज मीणा का दौसा में पेट्रोल पंप है। पंप पर लूट की वारदात हो गई थी। इसी सिलसिले में वह एसपी मनीष अग्रवाल के संपर्क में आया। नीरज एसपी का दलाल बन लोगों से काम कराने की गारंटी लेने लगा।