शहर में सड़कों पर बैठे नीमहकीम दांतों का इलाज कर रहे हैं। यदि आपके दांतों में दर्द है, तो ये खुद की बनी दवा देते हैं। न एक्स-रे की जरूरत, न दवाई की। इसके साथ ही कई झोलाछाप दंत चिकित्सकों ने डिग्रीधारी युवा डेंटिस्ट के नाम पर क्लीनिक खोल लिया हैं। डिग्रीधारी युवाओं की आड़ में ये खुद इलाज कर रहे हैं। मारवाड़ के ग्रामीण अंचल से आने वाले भोले-भाले लोग इनके चक्कर में फंसकर दांत संबंधित बीमारियों की जांच के बहाने एक नई बीमारी अपने साथ ले जा रहे हैं। एक्सपोज टीम ने शहर में सड़कों पर चलते-फिरते नीमहकीमों को अपने कैमरे में कैद किया।
इस तरह करते हैं इलाज
सड़कों पर बैठकर दांतों का इलाज करने वाले नीमहकीम बिना एक्स-रे लिए रूट कैनाल ट्रीटमेंट तक कर देते हैं। बिना एक्स-रे के दांतों की जड़ की लंबाई और बीमारी के कारण का पता नहीं लग पाता है। इसलिए ये दांतों में मसाला भरते हैं या जड़ से निकाल देते हैंै। इसका विपरीत प्रभाव मरीज पर बाद में पड़ता है।
जांच के बहाने देते हैं नई बीमारी
दांतों के नीमहकीम उपकरणों को स्टरालाइज तक नहीं करते। जिस उपकरण का इस्तेमाल करते हैं, उसे सिर्फ पानी से धोकर छुट्टी कर लेते हैं। इन उपकरणों के माध्यम से रोगी का स्लाइवा एक से दूसरे के मुंह में जाकर कई संक्रामक बीमारियों को जन्म देता है। अधिकतर बीमारियां स्लाइवा से होती है। ऐसे में दांतों का इलाज कराने वाले इन रोगियो को एड्स, हेपेटाइटिस, हरपीज जैसी कई खतरनाक और संक्रामक बीमारियां लगने का डर रहता है।
नहीं होता बीमारियों का ज्ञान
दांतों के इलाज में कई तरह की सर्जरी होती है। इनके लिए संबंधित उपकरण होना आवश्यक है। लेकिन नीमहकीमों को बीमारियों की जानकारी नहीं होती है। पैरियोडॉन्टिक सर्जरी, एन्डोडॉन्टिक सर्जरी, रूट कैनाल ट्रीटमेंट, कैपिंग, ब्रिज आदि की इन्हें जानकारी नहीं होती है।
गली-गली में नीमहकीम
शहर में सोजती गेट के पास क्लीनिक लगाकर बिना किसी डिग्री के युवक दांतों का इलाज कर रहे हैं। रणछोड़दास मंदिर के पास और सरप्रताप स्कूल के सामने भी सड़क-छाप दंत चिकित्सक बैठे हैं। वहीं दांतों को साफ करने के लिए भी खुद की बनाई दवाइयां बेच रहे हैं।
सड़क-छाप दंत चिकित्सक से बातचीत
आप दांतों का इलाज कैसे करते हैं?
हम इलाज नहीं करते, दर्द होता है तो दांतों को निकालते हैं और मसाला भर देते हैं।
मसाला भरने के लिए कितना पैसा लेते हैं।
मसाला भरने का 150 रुपए लेते हैं।
आपने जो उपकरण अभी मरीज के मुंह में डाला, क्या इसे साफ करोगे।
अभी तो उपकरण उपयोग में ही लिया है। हर बार इसे पानी से साफ करता हूं।
सरकारी अस्पतालों के हाल खराब
सरकारी अस्पतालों में न तो चिकित्सक हैं और न ही उपकरण। प्राइवेट अस्पताल में इलाज महंगा होता है। इसलिए सस्ते इलाज के लालच में लोग नीम-हकीम दंत चिकित्सकों के जाल में फंस जाते हैं। जिले में 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से चिकित्सा अधिकारी दंत की पोस्ट सिर्फ 14 जगह ही है और पांच पद खाली हैं, वहीं दंत तकनीशियन की बात करें तो 6 पद में से मात्र एक भरा है और पांच पद खाली है। इन स्थानों पर दंत रोगों से संंबंधित समस्त उपकरण भी मौजूद नहीं है।
पदों का नहीं हुआ सृजन
राजस्थान सरकार के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से वर्तमान में राजस्थान में कुल स्वीकृत पद 395 हैं। इनमें से भी 66 पद अभी रिक्त है। आईपीएचएस (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड 2012 की गाइड लाइन के अनुसार) वर्तमान में चिकित्सा दंत अधिकारी के कुल पदों की संख्या 708 होनी चाहिए।
डॉ. ओपी थानकर, एडिशनल डायरेक्टर से सीधे सवाल-जवाब
दंत रोगों से संबंधित नीम-हकीम बढ़ रहे हैं, क्या विभाग इन पर कार्रवाई करता है।
हर जगह पांच लोगों की टीम बनी होती है वह कार्रवाई करती है।
सितम्बर 2014 से दंत चिकित्सकों की भर्ती नहीं हुई, आगे कब होगी?
हमने 2015 में 80 दंत चिकित्सक लगाए हैं। आगे भी जब स्वीकृति आएगी, तब भरे जाएंगे।
सीएमएचओ अनिल मित्तल से सीधी बात
शहर में कई नीमहकीम दंत चिकित्सक बैठे हैं, इन पर अभी कोई कार्रवाई हुई?
पिछले चार-पांच महीनों से कोई कार्रवाई नहीं हुई? लेकिन अब करेंगे।
सवाल : कार्रवाई नहीं होने के क्या कारण रहे?
सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं। इनमें व्यस्तता के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई।