
Kids using smartphones (Representational Photo)
बच्चों में स्मार्टफोन्स (Smartphones) और सोशल मीडिया (Social Media) के बढ़ते इस्तेमाल से डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्महत्या के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। अमेरिकी सीनेटर्स और एक्सपर्ट्स ने इस विषय में चिंता जताई है। उन्होंने गंभीर संकट बताया है और सरकार से इस विषय में एक्शन लेने की मांग की है। सीनेटर टेड क्रूज़ (Ted Cruz) ने सीनेट कॉमर्स कमेटी की सुनवाई में, जिसका टाइटल 'प्लग आउट: अमेरिका के युवाओं पर टेक्नोलॉजी के असर की जांच' था, कहा कि माता-पिता इस बात से चिंतित हैं कि बच्चे स्क्रीन पर कितना समय बिताते हैं और वे किस तरह का कंटेंट देखते हैं।
क्रूज़ ने कहा कि 8 से 12 साल के बच्चे अब हर दिन करीब 5.5 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं, जबकि टीनएजर रोज़ाना 8.5 घंटे से ज़्यादा समय स्क्रीन पर बिताते हैं। उन्होंने कहा कि एक टीनएजर के जागने का आधे से ज़्यादा समय स्क्रीन को घूरने में बीतता है और उनकी यह आदत काफी चिंताजनक है।
मनोविज्ञान एक्सपर्ट जीन ट्वेंज (Jean Twenge) ने सांसदों को बताया कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट 2012 के बाद तेज़ी से बढ़ा, जब स्मार्टफोन सामान्य हो गए और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किशोरों के लिए ऑप्शनल से लगभग ज़रूरी हो गया। ट्वेंज ने कहा, "2011 और 2019 के बीच किशोरों और युवा वयस्कों में क्लिनिकल-लेवल का डिप्रेशन दोगुना हो गया। इसी दौरान 15 से 19 साल की लड़कियों में खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए इमरजेंसी रूम में जाने के मामले दोगुने हो गए और 10 से 14 साल की लड़कियों में चार गुना बढ़ गए, जबकि इन उम्र के ग्रुप में आत्महत्या की दर भी दोगुनी हो गई। मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट का समय आर्थिक कारणों से मेल नहीं खाता था, लेकिन यह स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ने के साथ-साथ बढ़ा। यह पहली बार था जब ज़्यादातर अमेरिकियों के पास स्मार्टफोन थे।"
रैंकिंग सदस्य मारिया कैंटवेल (Maria Cantwell) ने रिसर्च का हवाला दिया जिसमें दिखाया गया है कि टीनएजर सिर्फ़ स्कूल के घंटों के दौरान रोज़ाना एक घंटे से ज़्यादा स्मार्टफोन पर बिताते हैं और इस दौरान वो ज़्यादातर सोशल मीडिया का ही इस्तेमाल करते हैं। कैंटवेल ने कहा, "रिसर्च ने भारी सोशल मीडिया इस्तेमाल को टीनएजर्स-युवाओं में एंग्ज़ायटी, डिप्रेशन और अकेलेपन की ज़्यादा दरों से जोड़ा है। 40% टीनएजर्स सोशल मीडिया की लत के चिंताजनक पैटर्न दिखाते हैं, जिससे आत्महत्या के व्यवहार का खतरा दोगुना हो जाता है।"
एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि स्मार्टफोन्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से नींद की कमी और आमने-सामने की बातचीत में कमी देखने को मिली है। लोग अब दोस्तों के साथ व्यक्तिगत रूप से काफी कम समय बिताते हैं और पिछली पीढ़ियों की तुलना में कम सोते हैं। ये दोनों कारक खराब मानसिक स्वास्थ्य परिणामों से मज़बूती से जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार यह समस्या और भी बढ़ सकती है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्लेटफॉर्म में ज़्यादा शामिल हो रहा है, जिससे नशे की लत लगाने वाले और भावनात्मक रूप से हेरफेर करने वाले कंटेंट के संपर्क में आने का खतरा बढ़ रहा है।
Updated on:
20 Jan 2026 02:00 pm
Published on:
20 Jan 2026 09:27 am
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