
चुनावी लहर में किए गए वादे विकास के नाम पर निकले खोखले
सीकर. राजस्व गांव ढाणी पावण्डा सुविधाओं की बाट जौहता रह गया हैं। ग्राम पंचायत बावड़ी के राजस्व गांव ढाणी पावण्डा में विकास की बात करते हैं तो आज भी राजस्व गांव पिछड़ा हुआ हैं। गांव के सैकड़ों ग्रामीण आज भी सरकार से विकास की उमीद लगाए बैठे है। लेकिन कोई सुनने वाला तक नहीं हैं। ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया कि 2017 में पावण्डा की ढाणी राजस्व गांव बना हैं। गांव में सुविधाओं को टोटा ही टोटा हैं।
चुनावी साल में नेता करते हैं विकास के खोखले दावे
सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि चुनावी साल में नेता घर-घर जाकर कई वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्या तक पूछने तक नहीं आते है। विकास की दृष्टि से पावण्डा की ढाणी के हालात अच्छे नहीं हैं।
रैतीली मिट्टी में चलकर राशन लाने को मजबूर
ग्रामीणों ने पत्रिका को गांव की मूलभूत समस्याएं बताते हुए बताया कि गांव में एनएच 52 लाखनी मोड़ से पावण्डा की ढाणी होती हुई सौथलिया तक डामरीकरण नहीं होना सबसे बड़ी समस्या हैं। पंचायत मुख्यालय बावड़ी से राजस्व गांव पावण्डा की ढाणी तक डामरीकरण नहीं हैं। यहां भवन के अभाव में आनबाड़ी केन्द्र भी नहीं चल रहा हैं इतना ही नहीं यहां पर पशु उप स्वास्थ्य केन्द्र की भी कोई व्यवस्था नहीं हैं। ऐसे में पशुपालकों को रींगस, बावड़ी दूर दराज ले जाकर इलाज करवाना पड़ता हैं। कुछ गरीब पशुपालक पशुओं के इलाज करवाने के लिए असमर्थ होने से पशु मर जाते हैं।
पावण्डा निवासी रामस्वरूप ने बताया कि आज भी रैतीली मिट्टी में चलकर करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित पंचायत मुख्यालय बावड़ी से सरकारी योजनाओं का राशन, खेती का खाद, बीज सहित अन्य चीजें लाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों की मांग हैं कि गांव में उप सहकारी समित या फिर राशन की दुकान होनी चाहिए।
सागरमल ने बताया कि गांव की समस्याओं को लेकर क्षैत्रीय विधायक बंशीधर बाजिया, सांसद सुमेद्यानंद सरस्वती , मुख्यमंत्री जनसंवाद में ज्ञापन देकर थक चुके हैं। लेकिन थोथे आश्वासन के अलावा गांव के लोगों को कुछ नहीं मिला हैं। ऐसे में आज भी गांव विकास को मौहताज हैं। सैकड़ों ग्रामवासियों ने सरकार से मांग की हैं कि राजस्व गांव पावण्डा की ढाणी को मूलभूत सुविधाएं कर्रवाई जाए।
Published on:
07 Aug 2018 03:47 pm
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