23 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Video: इस कुंड के पानी में गल गए थे पांडवों के अस्त्र-शस्त्र, सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने यहां लगाई डुबकी

सोमवती अमावस्या का स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने सूर्यकुण्ड में डूबकी लगाकर गोमुख से पवित्र जल भर मंदिरों में पूजा अर्चना की...

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Dinesh Saini

Dec 18, 2017

Lohagarh

उदयपुरवाटी। लोहार्गल धाम में सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने सूर्यकुण्ड में सोमवती अमावस्या का स्नान किया। सोमवती अमावस्या को स्नान करने वाले श्रद्धालु अल सुबह पांच बजे ही लोहार्गल पहुंचने का सिलसिला जारी हो गया था जो कि दोपहर बाद तक जारी रहा। इस बार सर्दी में सोमवती अमावस्या आने श्रद्धालु थोड़ी कम संख्या में लोहार्गल पहुंचे। इसके अलावा रविवार को भी अमावस्या होने से सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। इधर सोमवार को लोहार्गल में सोमवती अमावस्या का स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने सूर्यकुण्ड में डूबकी लगाकर गोमुख से पवित्र जल भर मंदिरों में पूजा अर्चना की। श्री लक्ष्मीनारायण राधाकृष्ण मंदिर में बालिका कृष्णा ने महिला श्रद्धालुओं को सोमवती अमावस्या की कथा सुनाई। पूजा अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने गरीबों को फल, वस्त्र, अनाज आदि बांटे। गणेश मंदिर के पास गायों का चारा डाला गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुण्ड पर थाना इंचार्ज एसआई राजेन्द्र सिंह, एएसआई टेकचंद मीणा, हैड कॉस्टेबल विक्रम जाप्ते के साथ मौजूद रहे है।

दुनिया भर में राजस्थान कला-संस्कृति, विरासत व धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां कई ऐसे पवित्र स्थल हैं, जहां सभी धर्म के लोग शीश झुकाते हैं। आस्था से जुड़े इन स्थलों में राज्य के झुंझुनूं जिले से करीब 70 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत की घाटी में बसा उदयपुरवाटी से 10 किमी. की दूरी पर स्थित है लोहार्गल। यह राजस्थान का पुष्कर के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है। इस जगह का संबंध भगवान परशुराम, शिव , सूर्य व विष्णु से है। इतना ही नहीं, इस स्थान पर पांडवों के साथ कुछ ऐसा चमत्कार हुआ जो इतिहास बन गया।

गल गए थे पांडवों के अस्त्र-शस्त्र
महाभारत युद्ध समाप्ति के पश्चात पाण्डव जब आपने भाई बंधुओं और अन्य स्वजनों की हत्या करने के पाप से अत्यंत दु:खी थे, तब भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर वे पाप मुक्ति के लिए विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन करने के लिए गए। श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया था कि जिस तीर्थ में तुम्हारे हथियार पानी में गल जाए वहीं तुम्हारा पाप मुक्ति का मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पाण्डव लोहार्गल आ पहुँचे तथा जैसे ही उन्होंने यहाँ के सूर्यकुण्ड में स्नान किया, उनके सारे हथियार गल गये। उन्होंने इस स्थान की महिमा को समझ इसे तीर्थ राज की उपाधि से विभूषित किया। लोहार्गल से भगवान परशुराम का भी नाम जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस जगह पर परशुराम जी ने भी पश्चाताप के लिए यज्ञ किया तथा पाप मुक्ति पाई थी।