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स्मार्टफोन और ऐप्स ने बुजुर्गों की जिंदगी बनाई आसान, तकनीक सीखकर हुए आत्मनिर्भर; साइबर सुरक्षा भी बनी जरूरी

Senior Citizens Digital Inclusion: तकनीकी साक्षरता के कारण सीनियर सिटीजन अब आत्मनिर्भर हो रहे हैं और ऐप्स के जरिए घर बैठे दवाएं मंगा रहे हैं। हेल्पएज इंडिया के सर्वे के अनुसार, 41% बुजुर्गों के पास स्मार्टफोन है, लेकिन साथ ही उन्हें साइबर ठगी से सुरक्षित रहने की भी जरूरत है।
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Senior Citizens Digital Inclusion

मालवीय नगर निवासी 71 वर्षीय उषा सिंघल (Photo-Patrika)

जयपुर। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अब जिस तेजी से तकनीकी माध्यमों और साधनों ने दुनिया बदली है उसके साथ कदमताल करने के लिए यह कहावत बदलना जरूरी है। कुछ सीनियर सिटीजंस ने इस बदलाव को अपना लिया है और इससे उनकी दूसरों पर निर्भरता काफी कम हो गई है। बहुत से बुजुर्ग इन डिजिटल उपकरणों को चलाना और इनसे जुड़ी सुरक्षा की जानकारी पाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समुचित जानकारी का कोई भरोसेमंद जरिया नहीं मिल पाता है।

जिन लोगों ने इसे सीखा है वे दूसरों के लिए तकनीकी आत्म निर्भरता का उदाहरण बन रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं मालवीय नगर निवासी 71 वर्षीय उषा सिंघल। इनके साथ घर में एक दुर्घटना हुई और डिजिटल माध्यमों की जानकारी ने इनके लिए दुविधा वाली स्थितियों को आसान कर दिया। हाल ही घर में गिरने से इनके 77 वर्षीय पति हरिचरण सिंघल को कई जगह चोट आई। जांच के बाद डॉक्टर ने दवाइयां लिख दी। चूंकि ये ऐप्स चलाना जानती हैं और पहले भी दवाएं मंगवाती रही हैं तो इन्होंने वो आसानी से कर लिया जो आजकल केवल युवाओं की विशेषता मानी जाती है। इन्होंने दवाओं के ऐप पर डॉक्टर की पर्ची अपलोड कर दवाएं ऑनलाइन ऑर्डर कर दी। कुछ घंटों के बाद पूरी दवाएं घर पर ही आ गई। इन्हें अब ऑनलाइन दवा मंगाने पर इंतजार नहीं करना होता और तय शेड्यूल के अनुसार ही पूरा कोर्स चलता है। न ही अलग-अलग मेडिकल स्टोर जाना होता है। ऐप्स पर दवाएं ऑर्डर करने से उनसे जुड़े डिस्काउंट या ऑफर्स आदि का लाभ भी लिया जा सकता है। यदि ऐप्स से बेहतर ढंग से परिचित हो जाएं तो दूसरे ऐसे ऐप्स के साथ कीमतों व अन्य चीजों की तुलना भी की जा सकती है।

बचे समय का उपयोग

उषा सिंघल ने बताया कि डिजिटल तकनीक को सीखने के बाद उनकी भागदौड़ घटी है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

ऐसे में अब बचे हुए समय का उपयोग रिश्तेदारों या सहेलियों के साथ बातचीत करने और पुराने शौक पूरा करने में बीत रहा है।

साइबर लिटरेसी की बेसिक जानकारी जरूरी

साइबर एक्सपर्ट गजेंद्र शर्मा ने बताया कि बुजुर्गों को बैंक खाते का मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड बनाने, ओटीपी, बैंक पिन और पासवर्ड किसी से साझा न करने जैसी साइबर लिटरेसी की बेसिक जानकारी होनी चाहिए। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल भुगतान सुरक्षित तरीके से उपयोग करना आना चाहिए। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित मात्रा में साझा करें और गोपनीयता सेटिंग्स का ध्यान रखें। यह ध्यान रखें कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। फर्जी फोन कॉल, ईमेल और मैसेज से भी सावधान रहें। साइबर धोखाधड़ी होने पर परिवार, बैंक या संबंधित हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए।

खतरों को पहचानना भी जरूरी

राजस्थान का हाल

127782 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज, (वर्ष 2025 में)

इस साल के आंकड़े

  • 96,886 शिकायतें अलग-अलग जिलों में
  • 335 केस हुए दर्ज अलग-अलग प्रकार की ठगी के
  • 387.53 करोड़ रु. है ठगी की रकम का आंकड़ा (जनवरी से 12 जुलाई तक)

देश की स्थिति

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के अनुसार देश में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

  • 36.4 लाख से अधिक वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हुई (हाल के सरकारी आंकड़ों के अनुसार)
  • 22845 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी हुई है लोगों से

डिजिटल समावेश सूचकांक

वरिष्ठ नागरिकों का डिजिटल इन्क्लूजन इंडेक्स 50.71 (100 में) रहा।

  • 41% बुजुर्गों के पास है स्मार्टफोन।
  • 13% बुजुर्ग कंप्यूटर, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं।
  • 73% बुजुर्गों का मानना है कि डिजिटल तकनीक ने उन्हें युवाओं के करीब लाने में मदद की है।
  • 60-70 वर्ष आयु वर्ग के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर उन शिक्षित वृद्धों में अपेक्षाकृत अधिक डिजिटल साक्षरता पाई गई, जो परिवार के युवाओं के साथ रहते हैं।
  • 31% वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी डिजिटल प्रशिक्षण योजनाओं की जानकारी।