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स्त्री शरीर का नाम नहीं, वह दिव्यता का रूप: गुलाब कोठारी

Patrika Book Fair 2025: जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में चल रहे पत्रिका बुक फेयर के दूसरे दिन रविवार को भी पुस्तक प्रेमियों का आपार उत्साह नजर आया। यहां राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पुस्तक ‘स्त्री देह से आगे’ पर परिचर्चा हुई।

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Gulab Kothari

Patrika Book Fair 2025 : जयपुर। जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में चल रहे पत्रिका बुक फेयर के दूसरे दिन रविवार को भी पुस्तक प्रेमियों का आपार उत्साह नजर आया। यहां राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पुस्तक ‘स्त्री देह से आगे’ पर परिचर्चा हुई। परिचर्चा में कोठारी ने श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए पुस्तक के सार को बताया।

कोठारी ने कहा, जो कुछ भी ज्ञान पढ़ाई के रूप में मिलता है वह बाहरी है। हम केवल शरीर की बात करते हैं। स्त्री शरीर का नाम नहीं है। दिव्यता, वात्सल्य, माधुर्य, पोषण और निर्माण की क्षमता स्त्री है। सूक्ष्म में जीना केवल स्त्री ही जानती है। वह पति को संतान में रूपांतरित करती है। स्त्री जानती है कि उसके गर्भ में आया जीव पिछला कौनसा शरीर छोड़कर आया है। कौनसे संस्कार लेकर आया है। उसे वह मानवता के संस्कार देती है। पशु का शरीर छोड़कर आने वाले जीव को भी स्त्री इंसान बनाती है। घर में जीने लायक बनाती है। जीव का परिष्कार स्त्री की दिव्यता का बड़ा स्वरूप है।

कोठारी ने कहा, स्त्री मन की भाषा समझती है, वरना ऐसे ही अभिमन्यु नहीं बन जाते। गर्भाधान के साथ ही जीव की उपस्थिति मां को समझ आने लगती है। पिता को इसका पता नहीं चलता। यह ताकत केवल स्त्री के पास ही है। शादी के बाद पति के पूरे परिवार की शक्ति स्त्री में समाहित होती चली जाती है, यह उसका सशक्तिकरण है।

समाज और देश का निर्माण स्त्री ही कर सकती है

कोठारी ने कहा, 9 माह तक गर्भ में जीव को रखने की ताकत केवल स्त्री में है। जीव के आते ही मां के स्वभाव में परिवर्तन, जीवनचर्या, खानपान के साथ स्वप्न बदलने लगते हैं। समाज और देश का निर्माण स्त्री ही कर सकती है। उन्होंने कहा, दूसरा पक्ष यह भी है कि आज जो शादियां हो रही हैं, वह लड़के-लड़की के शरीर से हो रही हैं। जब तक दो आत्माओं का मिलन नहीं होगा तब तक वे कर्मों को बांट नहीं सकते।

दोनों जीव एकाकर होकर रहेंगे तभी आगे बढ़ेगे। शादी होने से पूर्व लड़की के भावी जीवन के बारे में सपने होते हैं। वह उन सपनों के लिए अनुष्ठान करती हैं। देवी-देवताओं की पूजा करती है। पुरुष वैसा सपना नहीं देखते। शादी के बाद स्त्री सपने के साथ जीती है। वह पति को भी उसी सपने की तरह मूर्त रूप देती है। उन्होंने कहा, स्त्री-पुरुष भी युगल रूप में अद्र्धनारीश्वर होते हैं। हर पुरुष भीतर स्त्री है और हर स्त्री भीतर पुरुष है। पुरुष को अपने अंदर के स्त्री भाव को कम नहीं होने देना चाहिए।

पुस्तक से स्त्री को परिभाषित करने की अनुपम दृष्टि मिलेगी

पुस्तक पर चर्चा करते हुए राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष शास्त्री कोसलेन्द्र दास ने कहा, स्त्री देह से आगे… पुस्तक कालजयी रचना है। ज्ञान से ही अमृत की प्राप्ति होती है और इस पुस्तक का अध्ययन करने पर ज्ञान रूपी अमृत की अनुभूति होती है।

वरिष्ठ पत्रकार सुकुमार वर्मा ने कहा, यह पुस्तक स्त्री को परिभाषित करने की अनुपम दृष्टि देती है। इसमें स्त्री के सशक्तिकरण के स्वरूप का विवेचन है। यह पुस्तक आने वाली पीढिय़ों को स्त्री को समझने की दृष्टि देती रहेगी। कार्यक्रम में आए प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान कोठारी ने किया। रामेश्वर प्रसाद शर्मा, गिरिराज खंडेलवाल, सुभाष गोयल, निशिता और दीपक नैनानी सहित अन्य पाठकों ने अपनी जिज्ञासाएं प्रस्तुत की।