
Jaipur: पुलिस की गिरफ्त में आरोपी (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। साइबर ठगों ने जयपुर के बुजुर्ग डॉक्टर दंपती को आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। कई दिनों तक वाट्सऐप वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखते हुए ठगों ने दंपती से 76 लाख रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले में साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 लाख रुपए फ्रीज करवा दिए। वहीं इस केस में दिल्ली और उत्तर प्रदेश से दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा के अनुसार, 5 अगस्त को बुजुर्ग डॉक्टर की पत्नी के मोबाइल पर वॉट्सऐप कॉल आया। आरोपियों ने खुद को जयपुर का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार, प्रेम कुमार गौतम और लखनऊ एटीएस का आइजी विक्रम सिंह बताया। उन्होंने दावा किया कि दंपती के आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और करोड़ों रुपए के वित्तीय अपराध में हुआ है।
खौफनाक घटना में संलिप्तता की जानकारी सुनने के बाद डॉक्टर दंपती डर गए। इस बीच साइबर ठगों ने गिरफ्तारी और परिवार के अन्य सदस्यों पर कार्रवाई की धमकी देकर उन्हें और डराया। वहीं साइबर ठगों ने वीडियो कॉल पर ही डॉक्टर दंपती को डिजिटल अरेस्ट करने की बात कही। कुछ भी गलती करने पर बड़ी कार्रवाई की धमकी दी गई। ऐसे में बुजुर्ग दंपति को कुछ समझ नहीं आया और वे उनकी जाल में फंसते चले गए।
ठगों ने वाट्सऐप पर कथित एनआईए नोटिस भेजकर एनओसी सर्टिफिकेट और सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी कराने का झांसा दिया। लगातार वीडियो कॉल पर रखते हुए उनसे एफडी और बैंक खातों की जानकारी तथा दस्तावेज की तस्वीरें मंगवाई गईं। दबाव में दंपती ने अपनी बचत को लिक्विडेट कर 76 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
मामले में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने कार्रवाई कर ठगी की करीब 50 लाख रुपए की राशि फ्रीज करवा दी। मामले में दिल्ली के गाजीपुर निवासी सतपाल सिंह और उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर निवासी अखंड प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस मामले में लगातार कार्रवाई में जुटी है।
Updated on:
21 Aug 2026 11:01 pm
Published on:
21 Aug 2026 10:56 pm
