
जयपुर
राजस्थान पुलिस अकादमी मैदान में मंगलवार को हुए डॉग शो में राजस्थान पुलिस में शामिल बेल्जियन शेफर्ड नस्ल के मेलिनोईस डॉग्स द्वारा अनेक आर्कषक व रोमांचकारी प्रदर्शन किये गये। इन प्रदर्शनों में बाधाओं को पार करना, अपराधी की पहचान करना, ऊंचाई पर छिपे अपराधियों तक पहुंचना शामिल है। महानिदेशक पुलिस ओ. पी. गल्होत्रा व शासन सचिव गृह रोहित कुमार की मौजूदगी में हुए इस डॉग शो में डॉग्स द्वारा अतिथियों को सलामी, क्रोलिंग, पीटी, हर्डलजम्प, एकन ड्रिल में आर्कषक मुद्राओं का प्रर्दशन एवं अबिडियेंस ड्रिल के साथ अटैचियों में रखी ड्रग को पकड़ना आदि का भी प्रदर्शन किया गया। इन करतबों को देख हर एक ने दांतों तले उंगली दबा ली।
गल्होत्रा ने बताया कि बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के मेलिनोईस डॉग्स अपराधियों की धरपकड़ की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए है। इन डॉग्स की सेवाएं अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास व्हाइट हाउस, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस, रूसी नौ-सेना, रयल आस्ट्रेलियन एयरफोर्स सहित विश्व के श्रेष्ठ रक्षा व पुलिस संस्थानों में ली जा रही है। इस नस्ल के डॉग्स की सूंघने की क्षमता आम आदमी से 40 गुना अधिक होती है तथा इन डॉग्स के लिये हर मौसम अनुकुल है। उन्होंने बताया कि राजस्थान पुलिस ने इन डॉग्स के सहयोग से अनेक संगीन अपराधों को बेनकाब किया है। कैसर नामक मेलिनोईस डॉग ने मुहाना में हत्या के आरोपी को 1 घण्टे में ही खोज निकाला था।
इसी प्रकार मेलिनोईस चार्ली ने भरतपुर में 9 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म कर हत्या के आरोपी को पकडवाने में सहयोग किया। मेलिनोईस डेल्टा को गोविन्दगढ में 500 मीटर गहराई में छुपाये गहनों को खोज निकालने पर डीजीपी डिस् क प्रदान की गई। इसी प्रकार मेलिनोईस लीमा को हलैना के जंगल से मृतक का शव तलाशने पर डीजीपी डिस् क प्रदान की गई थी। इस अवसर पर विशिष्ट महानिदेशक पुलिस एन. आर. के. रेड्डी, अतिरिक्त महानिदेक अपराध पी.के. सिंह, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, बी एल सोनी, नरसिम्हा राव, गोविन्द गुप्ता, हेमन्त प्रियदर्शी, जयपुर पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल, महानिरीक्षक जयपुर रेंज वी. के. सिंह व महानिरीक्षक पुलिस श्सुनील दत्त सहित वरिष्ठ अधिकारी गण मौजूद थे।
उप महानिरीक्षक पुलिस लक्ष्मण गौड़ ने राजस्थान पुलिस के डॉग स्क्वायड के बारे में तथा इसकी उपलब्धियो के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1962 में राजस्थान पुलिस में डॉग स्क्वायड गठित की गई । इस समय प्रदेश में मेलिनोईस नस्ल के कुल 27 डॉग्स कार्यरत है व वर्तमान में 10 मेलिनोईस डॉग्स को आरपीए में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
Published on:
08 Aug 2018 05:48 am
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