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द्रव्यवती नदी पर 36 किमी लंबे एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर आया बड़ा अपडेट, जेडीए ने शुरू किया काम, लाखों लोगों को मिलेगा फायदा

राजधानी जयपुर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव से राहत देने के लिए द्रव्यवती नदी पर 36 किमी लंबा एलिवेटेड रोड कॉरिडोर विकसित करने की योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। जेडीए ने इसपर काम शुरू कर दिया है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

May 02, 2026

Dravyavati river elevated road

Dravyavati river elevated road (Photo- AI)

जयपुर। राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव से राहत देने के लिए द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में 36 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड कॉरिडोर विकसित करने की योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने के लिए 5.76 करोड़ रुपए की कंसल्टेंसी निविदा जारी कर दी है। निविदा के तहत 26 मई तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

इस परियोजना की घोषणा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट जवाब के दौरान की थी। प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पानीपेच से सांगानेर तक विकसित की जाएगी, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों- टोंक रोड, अजमेर रोड और सीकर रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर जयपुर के लिए वैकल्पिक यातायात की धुरी साबित हो सकता है और लाखों लोगों को जाम से राहत मिलेगी।

डीपीआर में इन चीजों का रखा जाएगा ध्यान

डीपीआर तैयार करते समय पर्यावरण संरक्षण, जल प्रवाह की सुरक्षा, हाइड्रोलिक डिजाइन और सड़क सुरक्षा जैसे अहम पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नदी क्षेत्र के उपयोग को संतुलित रखते हुए परियोजना को टिकाऊ और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की योजना है। जेडीए अधिकारियों के अनुसार, निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर निर्माण कार्य की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जाएंगे।

परियोजना में कई तकनीकी चुनौतियां

हालांकि, इस परियोजना के सामने कई तकनीकी चुनौतियां भी हैं। प्रस्तावित मार्ग पर पहले से मौजूद एलिवेटेड रोड, मेट्रो कॉरिडोर और हाईटेंशन लाइनों के कारण डिजाइन तैयार करना जटिल हो सकता है। कुछ स्थानों पर सड़क को मौजूदा ढांचों से काफी ऊंचाई पर ले जाना पड़ेगा, वहीं ट्रैफिक के सुचारू संचालन के लिए रैम्प बनाने हेतु अतिरिक्त जमीन की जरूरत भी पड़ेगी।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि जहां पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, वहां सड़क निर्माण का विकल्प अधिक व्यावहारिक हो सकता है, जबकि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एलिवेटेड कॉरिडोर उपयुक्त रहेगा।

चरणबद्ध तरीके से शुरू हो सकता है काम

जानकारों का मानना है कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। पहले चरण में सांगानेर और प्रताप नगर क्षेत्र में 5 से 7 किलोमीटर तक निर्माण शुरू होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि द्रव्यवती नदी की कुल लंबाई करीब 47.5 किलोमीटर है, जिसमें से बड़े हिस्से पर यह परियोजना लागू की जा सकती है।

शहर को जाम से मिलेगी निजात

यदि योजना धरातल पर उतरती है, तो जयपुर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शहरी जीवन की गति भी बेहतर होगी।