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राजस्थान में सिर्फ 8 घंटे ही अब कमर्शियल वाहन चला सकेंगे ड्राइवर, राज्य सरकार ने जारी किए निर्देश

राजस्थान के अंदर सभी तरह के व्यावसायिक वाहन चालक अब 8 घंटे ही वाहन चला सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन में राज्य सरकार ने निर्देश जारी किए हैं।
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जयपुर

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Kamal Mishra

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Updated: 15 Sep 2025, 6:15 AM IST

CM Bhajanlal Sharma

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार देश भर में व्यावसायिक वाहनों के चालक अब 8 घंटे ही वाहन चला सकेंगे। इसके लिए परिवहन विभाग के साथ पुलिस विभाग एवं श्रम विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग तथा श्रम विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर 17 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश की अनुपालना में कार्रवाई शुरू कर दी है।

दिनों दिन सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसमें व्यावसायिक वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में बड़ा कारण चालक को वाहन चलाते समय नींद की झपकी आना है। चालक को नींद आने पर कई बार वाहन सड़क से नीचे उतर जाते हैं, कई बार सामने आ रहे वाहनों से भिड़न्त हो जाती है। इसके कारण बड़ी जनहानि भी होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है आदेश

राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर व्यावसायिक वाहनों से होने वाले हादसों को देखते हुए एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस संबंध में करीब 13 साल तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2025 को आदेश दिया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 91 ए मोटर ट्रांसपोर्ट वर्क्स एक्ट, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत व्यावसायिक वाहन चालकों की ओर से प्रतिदिन 8 घंटे ही वाहन संचालन के नियमों को प्रभावी रूप से लागू करवाया जाए। साथ ही समुचित प्रक्रिया निर्धारित करने के आदेश दिए।

सरकार ने जारी किए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करने के लिए 3 जुलाई को भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव ने संयुक्त वीसी आयोजित कर सभी राज्यों के दोनों विभागों के उच्चाधिकारियों को व्यावसायिक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए वाहन चलाने के लिए निर्धारित समयावधि के नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देश दिए।

नहीं मानने पर होगी कार्रवाई

इसके बाद 25 जुलाई को राजस्थान सरकार के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग की शासन सचिव शुचि त्यागी तथा श्रम विभाग के शासन सचिव पी. रमेश ने सभी जिला कलक्टर को निर्देश जारी किए। इसमें श्रम विभाग में पंजीकृत संस्थाओं से समन्वय बनाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का प्रचार-प्रसार करने, जागरुकता के लिए विभिन्न यूनियनों के साथ जिला स्तर पर संयुक्त कार्यशालाएं आयोजित करने, संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के संवेदीकरण के लिए बैठकें आयोजित करने तथा जिला स्तर पर समझाइश एवं जागरुकता के बाद संयुक्त प्रवर्तन अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

बड़ी चुनौती - कैसे तय करें कि चालक ने कितने घंटे वाहन चलाया

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में केन्द्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों ने बैठकें लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्धारित समयावधि के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के दिशा-निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन अधिकारियों के समक्ष बड़ी चुनौती यह है कि कैसे तय करें कि किस चालक ने कितने घंटे वाहन चलाया।

अगस्त माह में आयोजित बैठक में कई अधिकारियों ने यह समस्या उच्चाधिकारियों के सामने भी रखी। उनका कहना था कि फिलहाल मॉनिटरिंग करने का ऐसा कोई तरीका नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि किस वाहन चालक ने कितने घंटे वाहन चलाया। साथ ही ट्रक में जीपीएस लगाना भी अनिवार्य नहीं है, इसलिए यह काम और कठिन है।

पहले करेंगे समझाइश, फिर कार्रवाई

उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार व्यावसायिक वाहन चालकों को प्रतिदिन 8 घंटे वाहन चलाने को लेकर शुरू में समझाइश की जाएगी। ट्रांसपोर्ट संचालकों व वाहन चालकों से चर्चा कर उन्हें प्रेरित करेंगे। इसके बाद सुधार नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। -अवधेश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी, नागौर

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