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दुरुस्त सार्वजनिक परिवहन न होने से 800 नए वाहन रोज सड़कों पर, इनके लिए पार्किंग नहीं नतीजा …पार्किंग के लिए इंतजार और जाम

राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाल होने से लोग परेशान हैं। सच्चाई तो यह है कि सार्वजनिक परिवहन को दुरुस्त करने के लिए कभी गंभीरता से काम ही नहीं हुआ। तभी तो शहर में निजी वाहनों की संख्या बढ़ती चली जा रही है और सार्वजनिक परिवहन सीमित होकर रह गया। रही-सही कसर सीमित पार्किंग स्थलों ने पूरी कर दी।

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दुरुस्त सार्वजनिक परिवहन न होने से 800 नए वाहन रोज सड़कों पर, इनके लिए पार्किंग नहीं नतीजा ...पार्किंग के लिए इंतजार और जाम

दुरुस्त सार्वजनिक परिवहन न होने से 800 नए वाहन रोज सड़कों पर, इनके लिए पार्किंग नहीं नतीजा ...पार्किंग के लिए इंतजार और जाम

राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाल होने से लोग परेशान हैं। सच्चाई तो यह है कि सार्वजनिक परिवहन को दुरुस्त करने के लिए कभी गंभीरता से काम ही नहीं हुआ। तभी तो शहर में निजी वाहनों की संख्या बढ़ती चली जा रही है और सार्वजनिक परिवहन सीमित होकर रह गया। रही-सही कसर सीमित पार्किंग स्थलों ने पूरी कर दी। अब स्थिति यह हो गई है कि कई बार पार्किंग स्थलों में गाड़ी खड़ी करने के लिए लोगों को आधा घंटे से लेकर एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो रोज शहर की सडक़ों पर 800 से अधिक वाहन उतरते हैं। जबकि, पार्किंग स्थल सीमित हैं।

झूठे शपथ पत्र पेश कर खरीदी जा रहीं गाडिय़ां
जब लोग गाड़ी खरीदने जाते हैं तो घर में गाड़ी के लिए पार्किंग होने का झूठा शपथ पत्र देते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारी कभी भी घर पर आकर पार्किंग स्पेस नहीं देखते। कई घरों में तो चार से लेकर पांच गाडि़यां हैं। ऐसे में दो-तीन गाडि़यां घर में खड़ी होती हैं और बाकी गाडि़यां घर के बाहर सड़क पर खड़ी हो जाती हैं।

ये दिक्कत भी
-शहर के ज्यादातर तिराहे और चौराहे से 20 मीटर के दायरे में ही सिटी बसें और निजी बसें खड़ी होती हैं। इससे यातायात बाधित होता है।
ये हो: यदि यातायात पुलिस चौराहे और तिराहे से 100 मीटर दूर इन बसों को रुकवाए तो जाम नहीं लगेगा।
-सहकार मार्ग से जब वाहन अंडरपास होते हुए टोंक रोड पर आते हैं तो सामने ही बस स्टैंड बना है। वहां पर यात्री और बसें खड़ी रहती हैं।
ये हो: यदि इस बस स्टैंड को अंडरपास (टोंक रोड) से पहले शिफ्ट कर दिया जाए तो वाहनों की राह सुगम हो सकती है।

पिछले दस वर्ष में ये पार्किंग हुई विकसित
-चौगान स्टेडियम: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने पार्किंग विकसित की। यहां 400 चार पहिया और इतने ही दुपहिया वाहन खड़े होने की व्यवस्था है।
-सूरजपोल अनाज मंडी: 400 दुपहिया और 250 से अधिक चार पहिया गाड़ी खड़ी करने की जगह है।
-रामनिवास बाग: करीब तीन हजार चार पहिया वाहन खड़े करने की व्यवस्था है।
-जयपुरिया अस्पताल: भूमिगत पार्किंग में 300 चार पहिया और 400 के दो पहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं।

पीपीपी मोड पर शुरुआत हुई, लेकिन...
नगर निगम ने पीपीपी मोड पर सी स्कीम से गुजरने वाले नाले पर हाइड्रोलिक पार्किंग बनवाई। यहां 400 चार पहिया वाहन खड़े करने की व्यवस्था है। इस तरह की पार्किंग शहर के अन्य नालों के ऊपर भी विकसित की जा सकती है। इससे नाले की समस्या भी दूर हो जाएगी और गाडिय़ां खड़ी करने के लिए पार्किंग स्पेस भी मिल सकेगा।