
जयपुर। पहले नोटबंदी और बाद में जीएसटी ने कारोबारियों की ऐसी कमर तोड़ी कि लोगों का कामकाज अब तक पटरी पर नहीं लौटा है। इससे व्यापारी, आमजन व दिहाड़ी मजदूर तक प्रभावित हुए हैं। इसका असर हर क्षेत्र में पड़ा है। इन दोनों कानूनों के लागू होने के बाद पहली दीपावली व दशहरे के त्योहार पर भी इसका असर साफ देखा जा रहा है। ऐसे रावण के पुतलों पर महंगाई की मार छाई हुई है। गत वर्ष की तुलना में पुतले बनाने के आधे ऑर्डर भी नहीं मिले हैं। ऐसे में पुतला बनाने वाले छाबड़ीवाले परिवारों के कारीगर आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं। कालवाड़ रोड, करधनी, गोविन्दपुरा में पिछले दस साल से रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों के चेहरे से इसलिए रौनक गायब है कि वे जहां एक माह पूर्व से ही पुतले बनाने का कार्य शुरू कर देते थे, लेकिन इस बार नाम मात्र के ऑर्डर से ठाले बैठे हैं। पुतले वाले एक कारीगर का कहना है कि करीब बीस साल से रावण के पुतले बनाने का कार्य कर रहा है। गत वर्ष पचास पुतले बनाने का ऑर्डर मिला था, वहीं इस बार यह संख्या आधा दर्जन भी नहीं पहुंची है। फिर भी छाबड़ी वाले अपने स्तर पर बिना ऑर्डर करीब सौ पुतले तैयार कर चुके हैं। उनकी चिंता यह है कि वे आर्थिक रूप से पहले ही कमजोर हैं और जेब से पैसा लगाकर रावण के बड़े-छोटे पुतले तैयार किए हैं, यदि इनकी बिक्री नहीं हुई तो उनको भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
ये है पुतले के दाम
करधनी में दशहरा पर्व के लिए पांच फीट से पचास फीट के रावण के पुतले बनाते है। बच्चों के लिए चार-पांच फीट के बच्चा रावण तो मेलों आदि के लिए 25 से पचास फीट ऊंचे रावण तैयार होते हैं। कागज, बांस महंगा होने से अब इसमें खर्चा भी ज्यादा आने लगा है। बच्चा रावण के पुतले 400 से 600 रुपए, बड़े पुतले 1500 से 2500 व उससे बड़े पुतले पांच हजार रुपए तक में बनाए जाते हैं। छोटे पुतलों में 200 रुपए, बड़े पुतलों में 1500 से 4000 हजार रुपए तक का खर्चा आता है।
बादल बढ़ा रहे चिन्ता
एक ओर मांग व बिक्री कम होने से पुतले बनाने वाले कारीगर निराश हैं, वहीं मौसम के बदलते मिजाज व बादलों ने उनकी चिन्ता और बढ़ा दी है। बारिश से खुले में पड़े पुतलों के नुकसान होने की आशंका है।
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Published on:
26 Sept 2017 11:20 pm
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