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Damodar Dwadashi 2020 : जितना कठिन है उतना ही फलदायक है विष्णुजी का यह व्रत

श्रावण मास के शुक्ल चरण के बारहवें दिन पड़नेवाली द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे दामोदर द्वादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा करने से जीवन में बहुत खुशी और समृद्धि मिलती है। मान्यता है कि इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

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Dwadashi Tithi Ka Mahatva , Damodar Dwadashi Vrat

Dwadashi Tithi Ka Mahatva , Damodar Dwadashi Vrat

जयपुर.
श्रावण मास के शुक्ल चरण के बारहवें दिन पड़नेवाली द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे दामोदर द्वादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा करने से जीवन में बहुत खुशी और समृद्धि मिलती है। मान्यता है कि इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

दामोदर द्वादशी व्रत में नियम पालन का महत्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि विष्णुजी का यह कठिन व्रत है लेकिन बहुत फलदायक भी है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें धूप—दीप—फूल अर्पित कर मिठाई का भोग लगाएं। विष्णुजी का पंचामृत अभिषेक करें। विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें। दिनभर उपवास रखें, इस दिन अन्न का सेवन भूल कर भी ना करें।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ दामोदर द्वादशी व्रत करनेवालों को अग्नष्टोम यज्ञ का फल प्राप्त होता। मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। दामोदर द्वादशी तिथि को व्रत करके दिन-रात भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करनेवालों को गोमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सौत्रामणि यज्ञ के फल के साथ सहस्र गोदान का पुण्यफल प्राप्त होता है।