
जयपुर में शनिवार को साहित्यकारों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। मौका था 1994 से निरंतर प्रदान किए जा रहे 'शमशेर सम्मान' का। इस वर्ष, वर्ष 2021 से 2024 तक के बकाया और वर्तमान पुरस्कारों की श्रृंखला में ए. अरविंदाक्षन, रविभूषण, सवाईसिंह शेखावत, डॉ. भरत प्रसाद, असंगघोष, भालचंद्र जोशी, अनिल मिश्र और डॉ. दुर्गाप्रसाद गुप्त को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार डॉ. जितेंद्र भाटिया ने इस सम्मान की प्रामाणिकता पर जोर देते हुए कहा:
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात साहित्यकार डॉ. हेतु भारद्वाज ने शमशेर बहादुर सिंह के व्यक्तित्व के उन पहलुओं को छुआ जो आज की पीढ़ी के लिए अनछुए हैं।
वरिष्ठ लेखकों ने शमशेर की काव्य कला पर गहराई से चर्चा की।
वरिष्ठ कथाकार भालचंद्र जोशी ने आज के दौर में पुरस्कारों की बाढ़ और उनकी गिरती साख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस दौर में सम्मान देने की होड़ लगी है, वहां शमशेर सम्मान की निरंतरता और प्रतिबद्धता साहित्य जगत के लिए एक बड़ा भरोसा है।
संस्था के संयोजक प्रताप राव कदम ने भावुक होते हुए बताया कि 1994 में खंडवा जैसे छोटे शहर से शुरू हुआ यह सफर आज 50 से अधिक रचनाकारों को विभूषित कर चुका है। संसाधनों की कमी के बावजूद संस्था ने अपने साहित्यिक दायित्व को कभी झुकने नहीं दिया।
Published on:
01 Mar 2026 12:54 pm
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