
जयपुर। Free electricity in delhi : दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को अब मुफ्त में बिजली मिलेगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ये घोषणा की है। उन्होंने बताया कि 201 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च होने पर 50 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। वहीं अगर हम राजस्थान की बात करें तो यहां पड़ौसी राज्यों के शहरों की तुलना में सबसे ज्यादा विद्युत दर ली जा रही है। इसमें मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं का टैरिफ स्लेब शामिल है।
राजस्थान में 200 यूनिट तक बिजली उपभोग कर रहे घरेलू उपभोक्ता को हर माह 1462.50 रुपए ( Electricity Bill Unit Rate in Rajasthan ) देने पड़ रहे हैं, जबकि गुडगांव, नोएडा, भोपाल सहित अन्य शहरों में यह शुल्क 900 से 1310 रुपए तक है। हालांकि, डिस्कॉम प्रशासन और विषय विशेषज्ञ दूसरे राज्यों की तुलना में यहां स्थितियां अलग होने और सब्सिडी रोकड़ ज्यादा देने का तर्क दे रहे हैं। इसके अलावा फिक्स चार्ज भी विद्युत लोड की बजाय उपभोग के आधार पर लिया जा रहा है।
इससे ऐसे उपभोक्ता खुद को लूटा हुआ महसूस कर रहा है, जिनका लोड तो 1 किलोवॉट ही है लेकिन फिक्स चार्ज (स्थाई शुल्क) 6 किलोवॉट वाले उपभोक्ता के अनुरूप ही देना पड़ रहा है। यानि, दोनों तरह के उपभोक्ता से एक समान स्थाई शुल्क ले रहे हैं। जबकि, ज्यादा विद्युत लोड वाले उपभोक्ता के लिए डिस्कॉम को ज्यादा संसाधन जुटाने पड़ते हैं। हालांकि, अब डिस्कॉम यहां भी विद्युत लोड के आधार पर भी स्थाई शुल्क तय करने का अध्ययन कर रहा है। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने स्थाई शुल्क में भारी कमी की है।
विद्युत लोड के आधार पर विद्युत तंत्र:
डिस्कॉम हर उपभोक्ता के विद्युत लोड के आधार पर उसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करता है। मसलन, एक कॉलोनी में 20 कनेक्शन हैं। उनमें से 8 उपभोक्ता ने 2 किलोवॉट, 4 ने छह और बाकी 8 उपभोक्ता ने 10 किलोवॉट विद्युत लोड फिक्स कर रखा है। ऐसे में डिस्कॉम उस कॉलोनी में तय विद्युत लोड के आधार पर विद्युत तंत्र विकसित करता है।
इस तरह साइड इफेक्ट:
1 किलोवॉट विद्युत लोड वाले उपभोक्ता से भी 220 रुपए स्थाई शुल्क और 10 किलोवॉट विद्युत लोड से भी यही शुल्क निर्धारित है। जबकि, दस किलोवॉट वाले उपभोक्ता ज्यादा इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर रहा है। खास यह है कि यदि 10 किलोवॉट का लोड लेने वाला उपभोक्ता केवल 3 या 4 किलोवॉट का ही उपयोग करता है तो इसका खामियाजा डिस्कॉम को उठाना पड़ता है। कारण, डिस्कॉम ने उसके दस किलोवॉट के आधार पर ही विद्युत तंत्र विकसित किया है जो व्यर्थ गया।
राजस्थान में 200 यूनिट तक 3.85 से 6.40 रुपए प्रति यूनिट के आधार पर विद्युत शुल्क की गणना की जा रही है। इसके तहत 1462.50 रुपए प्रतिमाह बिल बन रहा है। इसमें विद्युत शुल्क 1122.50 रुपए, स्थाई शुल्क 230 रुपए, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी 80 रुपए व अरबन सेस 30 रुपए शामिल है।
(दोनों जगह विद्युत विनियामक आयोग स्तर पर दर तय है)
कहां क्या आ रहा है बिल..
गुड़गांव- 910 रुपए
नोएडा- 1310 रुपए
भोपाल- 1200 रुपए
अमृतसर- 1318 रुपए
पटना- 1310 रुपए
जयपुर- 1462.50 रुपए
(दूसरे शहरों में 200 यूनिट तक दो किलोवॉट आधार पर प्रतिमाह बिल राशि, जबकि जयपुर में स्थाई शुल्क है आधार)
इस तरह बिल की गणना
- 50 यूनिट तक 3.85 रुपए प्रति यूनिट यानि 192.50 रुपए
- अगले 100 यूनिट तक 6.10 रुपए प्रति यूनिट यानि 610 रुपए
- बाकी 50 यूनिट तक 6.40 रुपए प्रति यूनिट यानि 320 रुपए
- इस तरह 1122.50 रुपए विद्युत शुल्क होगा।
- इसके अलावा स्थाई शुल्क 230 रुपए, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी 80 रुपए (40 पैसे प्रति यूनिट) और अरबन सेस 30 रुपए (15 पैसे प्रति यूनिट) शामिल है।
- इस तरह बिल राशि 1462.50 रुपए हुई।
राजस्थान में तो टैरिफ बढ़ाने की है तैयारी...
उर्जा विभाग ने राज्य में विद्युत दर (टैरिफ) में बढ़ोत्तरी की तैयारी कर ली है। यह बढ़ोत्तरी 10 से 11 फीसदी तक हो सकती है। इसमें फिक्स चार्ज भी बढ़ेगा। इस पर मुहर लगती है तो 75 लाख से ज्यादा घरेलू व 15 लाख कॉर्मिशयल उपभोक्ताओं पर सीधा भार पड़ेगा। हालांकि, बीपीएल और 50 यूनिट प्रतिमाह तक उपभोग करने वालों को इस बढ़ोत्तरी से बाहर रखने की मंशा है।
फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का हो चुका फैसला...
(1) 55 पैसे प्रति यूनिट : 37 से 55 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त राशि का भार डालने का निर्णय लिया जा चुका है।
(2) 36 माह तक 5 पैसे प्रति यूनिट : अडानी पॉवर के करीब 2700 करोड़ रुपए चुकाने का भार 1.20 करोड़ उपभोक्ताओं पर होगा। इनसे 36 माह तक 5 पैसे प्रति यूनिट गणना के आधार पर वसूली होगी।
Updated on:
02 Aug 2019 03:47 pm
Published on:
02 Aug 2019 03:44 pm
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