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राजस्थान में भीषण गर्मी के चलते बिजली संकट, अब 12.50 रुपए यूनिट महंगी बिजली की करेंगे सप्लाई

भीषण गर्मी में विद्युत तंत्र हांफ रहा है और बिजली संकट बढ़ता जा रहा है। घोषित और अघोषित बिजली कटौती की मार झेल रहे प्रदेश में अब उस महंगे बिजली प्लांट से भी उत्पादन शुरू कर दिया गया है, जिसे इंजीनियर चलाने से इनकार करते रहे।

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जयपुर

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Kirti Verma

May 23, 2024

Electricity Crisis : भीषण गर्मी में विद्युत तंत्र हांफ रहा है और बिजली संकट बढ़ता जा रहा है। घोषित और अघोषित बिजली कटौती की मार झेल रहे प्रदेश में अब उस महंगे बिजली प्लांट से भी उत्पादन शुरू कर दिया गया है, जिसे इंजीनियर चलाने से इनकार करते रहे। धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट की 330 मेगावाट की तीनों यूनिट से बुधवार देर रात तक बिजली उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया चलती रही। इससे बिजली उत्पादन की लागत करीब 12.50 रुपए प्रति यूनिट आएगी, जो एक्सचेंज (बाजार) खरीद से भी ढाई रुपए यूनिट ज्यादा है। सूत्रों के मुताबिक उच्च स्तर पर तय किया गया है कि बिजली की कमी पूर्ति के लिए हर विकल्प अपनाया जाएगा, भले ही महंगी बिजली खरीदनी पड़े। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 3 मई के अंक में प्रकाशित खबर में ही इसकी आशंका जता दी थी।

एक्सचेंज में भी नहीं मिल रही बिजली
भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती ने जनता की परेशानी बढ़ा दी है। उत्पादन और डिमांड में 2500 मेगावाट तक अंतर गहरा गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में घोषित रूप से कटौती का समय आधे घंट से तीन घंटे तक पहुंच गया है। डिमांड पूरी करने के लिए ऊर्जा विकास निगम को एक्सचेंज से महंगी बिजली भी नहीं मिल पा रही है।

चार साल में डेढ़ माह ही मिली…

  • गैस आधारित यह पावर प्लांट अंतिम बार पिछले वर्ष सितम्बर में चलाया गया था। करीब 15 दिन तक बिजली उत्पादन किया गया।
  • इससे पहले वर्ष 2020 में करीब एक माह तक ही बिजली उत्पादन किया गया। इसके बाद संचालन बंद कर दिया गया।
  • इस बीच बिजली कंपनियां पिछले पांच साल में 600 करोड़ रुपए फिक्स चार्ज के रूप में लुटा चुकी हैं।

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बिजली फॉल्ट, ट्रिपिंग, केबल जलने के मामले बढ़े, कई घंटे बिजली गुल
प्रदेश में बिजली फॉल्ट, ट्रिपिंग, केबल जलने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे लोगों को गर्मी में कई घंटे तक बिना पंखे, कूलर के गुजारने पड़ रहे हैं। राजधानी जयपुर समेत कई बड़े शहरों में ही बदतर स्थिति है। जनता से लेकर जनप्रतिनिधि तक के फोन डिस्कॉम अफसरों के पास घनघना रहे हैं, लेकिन समय पर सुनवाई नहीं हो रही। इंजीनियर बचाव में तर्क दे रहे हैं कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल बिजली खपत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो गई। जबकि, हकीकत यह है कि जानकारी होने के बावजूद विद्युत तंत्र को पूरी तरह अपग्रेड नहीं किया गया।

सरकार का मकसद है कि हर हाल में बिजली सप्लाई होती रहे, इसलिए धौलपुर कंबाइंड पावर प्लांट को शुरू कर रहे हैं। रात में उत्पादन से ज्यादा डिमांड है, इसलिए कुछ जगह पावर कट कर रहे हैं। पूरी टीम निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए काम में जुटी है।
-हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री