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Jaipur: कंप्रेसर विस्फोट में उजड़े परिवारों को अब तक नहीं मिला इंसाफ, लकवाग्रस्त माता-पिता का इकलौते बेटे की मौत के बाद बुरा हाल

Rajasthan News: हादसे में जान गंवाने वाले जयपुर के झोटवाड़ा निवासी मुकेश कुमार शर्मा (45) अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। मुकेश के पिता बाबूलाल और माता संतोष देवी दोनों ही 'लकवा' (पैरालिसिस) से पीड़ित हैं।
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जयपुर

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Akshita Deora

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ललित तिवारी

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Updated: 22 Apr 2026, 10:32 AM IST

Jaipur Scrap Factory Compressor Blast

ईश्वर से न्याय की गुहार लगाते मुकेश के माता-पिता (फोटो: पत्रिका)

Jaipur Scrap Factory Compressor Blast: जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया (वीकेआइ) की एक स्क्रैप फैक्टरी में हुए कंप्रेसर धमाके की गूंज भले ही शांत हो गई हो, लेकिन दो परिवारों की जिंदगी में फैला मातम अब चीख-चीख कर इंसाफ मांग रहा है। करीब एक महीने पहले 16 मार्च को रोड नंबर 17 स्थित 'मैसर्स जगदम्बा इंडक्शन प्रा. लि.' में जो विस्फोट हुआ, उसने न सिर्फ दो मजदूरों की जान ली, बल्कि उनके पीछे रह गए बुजुर्गों और बच्चों के भविष्य को भी अंधेरे में धकेल दिया।

'लाठी' टूटी तो बिखर गया संसार

हादसे में जान गंवाने वाले जयपुर के झोटवाड़ा निवासी मुकेश कुमार शर्मा (45) अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। मुकेश के पिता बाबूलाल और माता संतोष देवी दोनों ही 'लकवा' (पैरालिसिस) से पीड़ित हैं। जिस बेटे ने 14 साल तक दिन-रात मेहनत कर बीमार माता-पिता की सेवा की, आज उसी की अर्थी उठने के बाद घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है। मुकेश की पत्नी नीतू के आंसू नहीं थम रहे, तो वहीं दो बच्चों के भविष्य पर 'फुलस्टॉप' लग गया है। बेटे हर्षित की बीबीए और बेटी दीपल की बीडीएस पढ़ाई अब आर्थिक तंगी की भेंट चढ़ने की कगार पर है।

14 साल की सेवा, पहले दिलासा…फिर झाड़ा पल्ला

परिजन का आरोप है कि मुकेश पिछले 14 साल से इसी फैक्टरी में अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही ने उनकी जान ले ली। आरोप है कि मशीनों का मेंटेनेंस नहीं था । हादसे के बाद फैक्टरी मालिक बी.एल. गुप्ता ने मदद का भरोसा दिया, लेकिन बाद में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया ।

अपनों को खोया, एफआइआर तक दर्ज नहीं

विस्फोट में जालौन (उत्तर प्रदेश) निवासी श्रीकांत, झोटवाड़ा निवासी मुकेश कुमार शर्मा, सीतापुर निवासी लवकुश और जालौन निवासी शिवशंकर घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल श्रीकांत ने 23 मार्च को और मुकेश कुमार शर्मा ने 28 मार्च को दम तोड़ दिया था। एक महीना बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार थाने की सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर है। परिजन का आरोप है कि फैक्टरी प्रबंधन के रसूख के आगे पुलिस एफआइआर दर्ज करने के बजाय सिर्फ 'मर्ग' (धारा 174) में मामला दर्ज कर खानापूर्ति कर रही है।

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