
कर्मचारियों और पेंशनरों पर रहमदिली अब सरकार के लिए ही गलफांस बन गई है। चिकित्सक, मेडिकल स्टोर संचालक, कर्मचारियों एवं पेंशनर ने मिलकर मुफ्त का चंदन इस कदर घिसा कि बिना मर्ज के ही सरकार को कर्ज की ओर धकेल दिया। भरतपुर जिले में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर परिवार प्रतिदिन करीब 25 लाख रुपए की दवा खा रहे हैं। आरजीएचएस के नाम पर दवा की जगह घरेलू सामान खरीदने की जानकारी के बाद सरकार ने मेडिकल स्टोर संचालकों का भुगतान रोक दिया है। संदेह के दायरे में आए पांच सौ कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है।
सतर्कता टीम ने कुछ ऐसे भी कर्मचारियों को चिह्नित किया है, जो एक माह में एक-एक लाख रुपए की दवा ले रहे हैं। कुछ निजी अस्पताल संचालक एवं सरकारी चिकित्सक भी इस बंदरबांट में शामिल हैं। अब तक महज मेडिकल स्टोर संचालकों पर ही सतर्कता दल की नजरें थीं, लेकिन मोबाइल पर आने वाली ओटीपी के बाद इसमें कर्मचारियों को भी बराबर का दोषी माना जा रहा है। उधर, भुगतान रोकने के बाद कुछ मेडिकल स्टोर ने कर्मचारी एवं पेंशनरों को दवा देना बंद कर दिया है।
नाम दवा, ले रहे काजू-बादाम
कर्मचारी और मेडिकल स्टोर की सांठगांठ ऐसी है कि वे 50-50 प्रतिशत राशि हड़प रहे हैं। कर्मचारी काजू-बादाम सहित कॉस्मेटिक सामान तक घर ले जा रहे हैं। ऐसे कर्मचारी चिह्लित किए गए हैं, जिन्होंने हर माह परिवार के सदस्यों को बीमार दिखाकर दवा लिखवाई हैं और घरेलू सामान खरीदा है।
रिपोर्ट मांगी है
टीम की कंट्रोलिंग सीधे जयपुर से हो रही थी। फिर भी बयाना के चिकित्सक के यहां पर्ची मिलने के संबंध में सीएचसी इंचार्ज से रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। डॉ. लक्ष्मण सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भरतपुर
Published on:
11 Sept 2022 09:10 pm
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