
जयपुर। नगर निकाय और पंचायत चुनावों में मतदाता स्वच्छ छवि और जमीनी काम करने वाले युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने के मूड में हैं। वंशवाद और धनबल की राजनीति करने वाले नेताओं के प्रति मतदाताओं में साफ नाराजगी है। पत्रिका के जनप्रहरी अभियान के तहत स्थानीय नेतृत्व को लेकर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सभी आयु वर्ग के पुरुष व महिलाओं ने उम्मीदवार के काम, चरित्र और ईमानदारी को प्राथमिकता दी।
स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार के काम और व्यक्तिगत चरित्र को मतदाताओं ने अहम माना है। सर्वे में 68 प्रतिशत लोगों ने इस पर सहमति जताई, जबकि पार्टी पहचान को केवल 18 प्रतिशत ने जरूरी माना। यह रुझान शहरी क्षेत्रों और महिला मतदाताओं में अधिक है।
नए चेहरे अब सिर्फ बदलाव की बात नहीं कर रहे, बल्कि सक्रिय रूप से भूमिका भी निभा रहे हैं। सर्वे के अनुसार युवा मतदाता परिस्थितियों और मुद्दों के आधार पर निर्णय लेते हैं। 70 प्रतिशत युवाओं ने माना कि उन्हें वंशवादी राजनीति पसंद नहीं है।
चुनावों में धनबल और बाहुबल के आधार पर उम्मीदवार तय किए जाने को मतदाता स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सर्वे में 78 प्रतिशत लोगों ने माना कि चुनाव में अत्यधिक पैसा खर्च करना अवैध या संदिग्ध तरीकों का संकेत है। वहीं 82 प्रतिशत ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को अस्वीकार किया।
निकाय चुनावों में उम्मीदवार की स्वच्छ और ईमानदार छवि पहली प्राथमिकता बन गई है। सर्वे के अनुसार 45 प्रतिशत लोगों ने अनुभव की तुलना में ईमानदारी को महत्वपूर्ण माना। वहीं केवल 10 प्रतिशत लोगों ने राय दी कि उम्मीदवार का अनुभवी होना सबसे जरूरी है।
पत्रिका के जनप्रहरी अभियान के विचार से सहमति जताते हुए 80 प्रतिशत ने माना कि आम नागरिकों को राजनीति में आना चाहिए। सर्वे में युवा, महिलाएं, शहरी और ग्रामीण- सभी वर्गों में इस सोच को समर्थन दिया है।
Updated on:
06 Feb 2026 05:28 pm
Published on:
06 Feb 2026 04:13 pm
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