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चारों रसायनशालाओं में आधी से अधिक औषधियों का निर्माण नहीं

आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए भले ही कई प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत में आयुर्वेद विभाग की अंदरूनी हालत पतली है।

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आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए भले ही कई प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत में आयुर्वेद विभाग की अंदरूनी हालत पतली है। एक तरफ विभाग के आला अफसर बड़े-बड़े दावे करते हैं, दूसरी तरफ विभाग की रसायनशालाओं में बीते तीन साल से आधे से अधिक औषधियों व चूर्णों का निर्माण नहीं हो रहा। इस वजह से आयुर्वेदिक औषधालयों में समय पर दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रहीं। इतना ही नहीं विभाग में 2 रुपए प्रति मरीज प्रतिदिन के हिसाब से बजट दिया जाता है जो कि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।

प्रदेश में आयुर्वेद विभाग की चार रसायनशाला हैं। इनमें जोधपुर रसायनशाला में 18 प्रकार के चूर्ण का निर्माण, अजमेर रसायनशाला में 15 प्रकार की औषधि, भरतपुर रसायनशाला में 9 प्रकार की औषधि और उदयपुर में 14 प्रकार की औषधियों, चूर्ण आदि का निर्माण किया जाता है। बीते तीन सालों में चारों रसायनशालाओं में आधे से अधिक औषधियों का निर्माण नहीं किया गया है।

हकीकत खोलते आंकड़े

रसायनशाला वर्ष 2012-13 वर्ष 2013-14 वर्ष 2014-15

जोधपुर रसायनशाला 7 चूर्ण नहीं बने 10 चूर्ण नहीं बने 10 चूर्ण नहीं बने
अजमेर रसायनशाला 5 औषधि नहीं बनीं 9 औषधि नहीं बनीं 12 औषधि नहीं बनीं

उदयपुर रसायनशाला 8 औषधि नहीं बनीं 7 औषधि नहीं बनीं 5 औषधि नहीं बनीं
भरतपुर रसायनशाला 5 औषधि नहीं बनीं 3 औषधि नहीं बनीं 5 औषधि नहीं बनीं

इन औषधियों का नहीं हो रहा निर्माण

जोधपुर रसायनशाला में लवण भास्कर, मधुयष्टि चूर्ण, पिप्पली चूर्ण, उदावर्त हर चूर्ण, बिल्वगिरी चूर्ण, सीतोपलादी चूर्ण, तालीसादी चूर्ण, अविपत्तीकरण चूर्ण, अजमेर रसायनशाला में आनन्द भैरव रस, कर्पूरधारा, कुटकी चिरायता, हरितकी चूर्ण, श्वेत पर्पटी, पथ्यादि चूर्ण, अर्क मकोय, एकादश चूर्ण, विषम ज्वरारी वटी, बहेडा चूर्ण, पंच सरकार चूर्ण, अर्क अजवाइन, भरतपुर रसायनशाला में शुभ्रा भस्म, कपर्द भस्म, शतावरी चूर्ण, कष्ण मरहम, जात्यादि तेल और उदयपुर रसायनशाला में नेत्र बिन्दु, शोथ क्वाथ, दद्रु दावानल, ईसबगोल भूसी का निर्माण नहीं हो पा रहा।

दो माह में औषधियों की कमी दूरी हो जाएगी
पहले पद काफी रिक्त थे। अब 1500 चिकित्सकों की भर्ती की गई है। बजट बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की और से व आयुष मिशन के तहत भी काफी बजट मिलेगा। आने वाले दो माह में किसी तरह की औषधियों की कमी नहीं रहेगी।

- विनीता श्रीवास्तव, निदेशक, आयुर्वेद विभाग