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प्रदेश का हर पांचवां व्यक्ति दूषित पानी पीने को मजबूर, फ्लोराइड, लवण और नाइट्रेट वाले पेयजल के मामले में राजस्थान सबसे आगे

सिर्फ 12 फीसदी घरों तक पहुंचा नल कनेक्शन, चार वर्षों में केन्द्र सरकार ने दिए 3166.15 करोड़, खर्च हुए 2947 करोड़

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jaipur

जयपुर। प्रदेश में पेयजल की समस्या के साथ दूषित पानी की भी बनी हुई है। केन्द्र और राज्य सरकार हर वर्ष पानी पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इसके बावजूद प्रदेश का हर पांचवां व्यक्ति किसी न किसी तरह का दूषित पानी पीने को मजबूर है। इस मामले में राजस्थान देश में अव्वल है। इसके चलते लोगों में कई तरह की बीमारियां फैलने का अंदेशा भी बना हुआ है।

प्रदेश के कई इलाकों में दूषित पेयजल की समस्या बनी हुई है। हाल ही में लोकसभा में भी यह मामला उठा तो पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की ओर से चौकाने वाले तथ्य उजागर किए गए। मंत्रालय की ओर से देश में सर्वाधिक दूषित पेयजल वाला राज्य राजस्थान को बताया गया। जबकि दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है। प्रदेश कुल बसावट 1 लाख 21 हजार 648 बताई गई है। इसमें से अभी भी करीब 19 हजार 893 बसावट में रहने वाले लोग दूषित पानी पी रहे हैं। यह राजस्थान के कुल बसावटों का करीब बीस फीसदी है। प्रदेश की फ्लोराइड प्रभावित 6159, नाइट्रेट प्रभावित 1074, लवण प्रभावित 12656 और लोहा प्रभावित 5 बसावट है। वहीं इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत केन्द्र ने गत चार वर्षों के दौरान राज्य को 3166.15 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। जबकि 2947 करोड़ भी खर्च हो चुके हैं।

12 फीसदी घरों तक पहुंच नल
मंत्रालय ने दूषित पेयजल की समस्या को कम से कम करने के लिए राज्यों को अधिक से अधिक घरों तक नल पहुंचाने की सलाह दी है। इसके बावजूद राजस्थान इसमें फिसड्डी बना हुआ है। फिलहाल महज 12.2 फीसदी घरों तक ही नल कनेक्शन पहुंच सके हैं। वहीं इसमें अधिक समय लगने के चलते फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में आरओ लगाने का का चल रहा है।

फ्लोराइड से हड्डी टेडी-मेढी तो नाइट्रेट से कैंसर का खतरा

फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक, लोहा और लवण का पानी में अधिकता होना लोगों की सेहत पर सीधा असर डालता है। जहां फ्लोराइड की अधिकता से हड्डी और दांतों पर सीधा असर होता है, वहीं नाइट्रेट से कैंसर तक होने की आशंका बनी रहती है। जबकि लवण की लगातार अधिक मात्रा शरीर में जाने से किडनी पर असर पड़ता है।