
शैलेन्द्र अग्रवाल/जयपुर। दिल्ली, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर राजस्थान सरकार प्रदेश में भी पूर्व विधायकों के 25 साल तक के पुत्र या पुत्री को भी पेंशन का हकदार मानने पर विचार कर रही है। इसके लिए प्रस्ताव पर परीक्षण चल रहा है। पेंशन संबंधी प्रावधान में यह बदलाव होने के बाद पूर्व विधायक और उसकी पत्नी की मौत के बाद उनके 25 साल तक के आश्रित पुत्र या पुत्री पेंशन के हकदार माने जाएंगे। इस तरह की मांग को लेकर एक पूर्व विधायक की पुत्री ने राज्य सरकार को पत्र भेजा था, जिसके आधार पर ही यह परीक्षण चल रहा है।
राजस्थान सहित लगभग सभी प्रदेशों में मौजूदा सांसदों व विधायकों के लिए तो आश्रित 25 साल तक के आश्रित पुत्र या पुत्री भी पेंशन के हकदार माने जा रहे हैं, लेकिन पूर्व विधायकों के लिए 7 राज्यों में ही इस तरह का प्रावधान है। लोकसभा-राज्यसभा के पूर्व सदस्यों के लिए भी आश्रित पुत्र-पुत्री को पेंशन का प्रावधान है। वर्तमान विधायकों व कुछ राज्यों में पूर्व विधायक, उनकी पत्नी व पुत्र-पुत्री के भी नहीं होने पर माता-पिता को पेंशन दी जा रही है। विचाराधीन प्रस्ताव में प्रदेश के लिए भी ऐसा प्रावधान जोड़ने पर विचार चल रहा है।
अभी तक यह मिलता है:
पांच साल तक सदस्य रहा तो मासिक 35000 रुपए व इससे अधिक समय रहने पर 1600 रुपए अतिरिक्त पेंशन। 70 वर्ष आयु होने पर पेंशन में 20 एवं 80 वर्ष आयु होने पर 30 प्रतिशत वृद्धि। इसके अलावा बस में यात्रा के लिए 200 पास, रेल-विमान-पोत-स्टीमर में यात्रा के लिए एक लाख रुपए तक किराया व सरकारी आवास गृह में ठहरने की सुविधा। पूर्व विधायक की मृत्यु होने पर उसके पति या पत्नी को मासिक 17500 रुपए या अंतिम पेंशन का 50 प्रतिशत, जो भी अधिक हो। बस में यात्रा के लिए 100 पास।
Published on:
20 Aug 2022, 10:45 AM IST
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