जयपुर. जब थिएटर की लाइट इनके चेहरे पर पड़ती है, तो यह एनर्जी से भर जाती हैं। दर्शकों की तालियों की गडग़ड़ाहट इन्हें मोटिवेट करती है। थिएटर इनके लिए सिर्फ पैशन नहीं, बल्कि एक हीलिंग पावर है, जिसने इन्हें कैंसर से उबरने से शक्ति दी है। हम बात कर रहे हैं थिएटर आर्टिस्ट रुचि गोयल की। वे बताती हैं कैंसर के बाद मुझे एक ऐसी एनर्जी की जरूरत थी जो मुझे फिर से खड़ा कर सके। इसीलिए मैंने ४६ की उम्र में थिएटर को चुना। मुझे वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक राही से पूरा सहयोग मिला। भले ही थिएटर से मेरा नाता पांच साल पुराना ही हो, लेकिन मैं१५ से ज्यादा नाटक कर चुकी हूं और दूसरे शहरों में परफॉर्मेंस दे चुकी हूं।
मैं महिलाओं से कहना चाहती हूं कि वे अपनी बीमारी को छिपाने की बजाय खुलकर बताएं, क्योंकि बीमारी का जितना जल्दी इलाज शुरू होगा, उसका निदान भी उतना ही जल्दी होगा। महिलाएं अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखें और बॉडी में कुछ भी एबनॉर्मल हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
एक मां हूं…टूट नहीं सकती थी
सन 2012 में मुझे ब्रेस्ट कैंसर का पता चला, मेरी फैमिली और मेरे फै्रंड्स के लिए यह हार्टब्रेकिंग मोमेंट था। लेकिन मैंने पहले दिन से ही हिम्मत जुटाना शुरू कर दिया। मैं जानती थी कि यदि मैं उदास हो गई तो पूरा घर बिखर जाएगा। मैंने कैंसर को बुखार की तरह ही लिया। उस समय मेरी छोटी बेटी के 12वीं के एग्जाम थे और मैं कीमोथैरेपी के दर्द के बाद भी सिर्फ मुस्कुराती रहती थी। उसने 12वीं में 91 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जिसने मुझे जोश से भर दिया। कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान मेरे हसबैंड और दोनों बेटियों ने मुझे संबल दिया।
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बचपन से खुलकर जीती आई हूं
मैं बचपन से ही खुलकर जीती आई हूं। शादी और दो बेटियों के जन्म के बाद मैंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ खुद के लिए भी समय निकाला। अपनी फै्रंड के साथ एक महिला क्लब खोला। आज हमारे क्लब को 19 साल हो गए हैं, उसमें हम कई ऐसी एक्टिविटीज करते हैं, जिसमें महिलाएं अपने टैलेंट को एक्सप्लोर करती हैं। क्लब में एंटरटेनमेंट, हैल्थ वर्कशॉप्स और मोटिवेशनल सेशंस भी होते हैं। मेरी वाओ वुमन क्लब की अध्यक्ष अनिता जैसलमेरिया सहित वो सभी महिलाएं हैं, जिन्होंने कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान मेरा मनोबल बनाए रखा।