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राजस्थान: फसल खराबे पर किसानों की सुध लेने ‘फील्ड’ में एक्टिव BJP, Congress ‘नदारद’!

Farmers affected by Heavy Rains in Rajasthan Latest News and Updates - प्रदेश में 'पोस्ट मानसून' अतिवृष्टि का मामला - प्रभावित ज़िलों में किसानों की सुध ले रहे भाजपा नेता - खेतों में उतरे पूनिया, तो हवाई सर्वेक्षण कर रही वसुंधरा - 'सरकार' और उनके नुमाइंदे फील्ड से दिख रहे दूर ! - बंद कमरों में हो हालातों की समीक्षा, राहत दिलवाने के दावे  

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Farmers affected by Heavy Rains in Rajasthan Latest News and Updates

Farmers affected by Heavy Rains in Rajasthan Latest News and Updates : प्रदेश में पोस्ट-मानसून हुई अतिवृष्टि से किसानों को हुए नुकसान का ज़ायज़ा लेने के मामले में भाजपा नेता कांग्रेस नेताओं की तुलना में ज़्यादा एक्टिव नज़र आ रहे हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया से लेकर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सहित अन्य नेता 'फील्ड' में उतरकर किसानों की सुध लेते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इन सभी के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर प्रभावित ज़िलों के लगभग सभी प्रभारी मंत्री तस्वीरों से नदारद दिख रहे हैं।

फिर हवाई सर्वेक्षण से ज़ायज़ा लेंगी वसुंधरा
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे एक बार फिर अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का जायज़ा लेने के लिए आज हवाई सर्वेक्षण करेंगी। जारी हुए कार्यक्रम के अनुसार राजे हेलीकॉप्टर से झालावाड़ के अकलेरा, खानपुर, सारोला, बकानी, पिड़ावा, सुनेल, भवानीमंडी और झालरापाटन के प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे करेंगी। इस दौरान उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह भी साथ रहेंगे।

खेतों में जाकर पूनिया ने ली सुध
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने भी अपने हाड़ौती और चित्तौड़गढ़ के 4 दिवसीय दौरे के दौरान खेतों में उतरकर अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों की सुध ली थी। पहले चित्तौड़गढ़ में और फिर बूंदी जिले में किसानों के बीच जाकर नुकसान को नज़दीक से देखा था। पीड़ित किसानों से मिलने के बाद पूनिया ने कहा, 'हाड़ौती संभाग सहित राज्य के अनेक हिस्सों में प्रदेश के किसानों को तेज बारिश से भारी नुक़सान हुआ है। किसान अपनी धान की खेती नष्ट होने से व्यथित हैं। अभी तक नुक़सान का आंकलन करने और तत्पश्चात् मुआवज़ा की व्यवस्था करने राज्य सरकार का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा है।'

बिरला तक पहुंचे किसानों के बीच
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक ने सोमवार को संसदीय क्षेत्र के अतिवृष्टि प्रभावित गांवों में पहुंचकर फसलों के नुकसान का जायजा लिया और किसानों की पीड़ा सुनी। बिरला ने किसानों को सरकार से पूरी मदद दिलवाने का आश्वासन भी दिया। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक और कृषि अधिकारियों की बैठक लेकर मौजूदा स्थितियों की समीक्षा की। साथ ही संभागीय आयुक्त और कोटा-बूंदी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि दोनों जिलों में आपदा ग्रस्त घोषित करने का तुरंत प्रस्ताव भिजवाया जाए।

बिरला ने कहा कि जिन किसानों को फसल बीमा हो रखा है उन्हें नुकसान का पूरा क्लेम मिलना चाहिए। इनमें कोताही नहीं होनी चाहिए। बिरला ने आपदा की घड़ी में सरकार से दिल खोलकर किसानों की मदद करने को कहा है। उन्होंने फसल बीमा कंपनी के रवैए को लेकर भी नाराजगी है।

गहलोत ने गहलोत को लिखा पत्र
राज्य सभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने भी भारी बारिश से किसानों को हुए नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा देने का अनुरोध किया है। सीएम गहलोत को लिखे पत्र में सांसद गहलोत ने कहा कि किसानों की खड़ी फसल के साथ कटाई के बाद सूखने के लिए खेतों में रखी गई फसलों को भी व्यापक पैमाने पर नुकसान हुआ है। इस फसली नुकसान का जिला कलेक्टरों के माध्यम से आकलन करवाकर किसानों को आपदा प्रबंधन कोष से मुआवजा दिया जाए।

गिरदावरी के निर्देश तो दिए, पर 'फील्ड' से नदारद
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो दिन पहले ही अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को हुए नुक्सान का आंकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश दिए हैं। जिला कलेक्टरों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि फसल खराबे की विशेष गिरदावरी कर किसानों को राहत दिलवाना सुनिश्चित किया जाए।

पोस्ट मॉनसून की तेज़ बरसात से हुए फसल खराबे की समीक्षा भले ही मुख्यमंत्री स्तर पर बंद कमरों में हो रही है, लेकिन प्रभावित किसानों को अब भी 'सरकार' और उनके नुमाइंदों को उनका वास्तविक दर्द बताने का इंतज़ार है। प्रभारी मंत्रियों के बीच भी खेतों में उतरकर हालातों का जायज़ा लेने से जुड़ी कोई हलचल नहीं दिख रही है।



बेमौसम बारिश हाड़ौती संभाग में नुकसान
बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी सोयाबीन, उड़द, मूंग, व धान की फसल बर्बाद हुई है. जिसमें सोयाबीन में पौने चार लाख व धान में एक लाख 5 हजार हेक्टेयर में नुकसान का अनुमान है। सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की कटकर खेतों में पड़ी हुई फसल को हुआ है। इसी तरह धान में भी खेत में कटकर पड़ी फसल को भी नुकसान है। यह नुकसान भी 50 से 55 फीसदी होने का अनुमान है।कोटा, बूंदी, झालावाड़ व बारां जिले में भी भारी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है।