
जम्मू कश्मीर से जारी हुए फर्जी हथियार लाइसेंस मामलों में नया पेंच सामने आया है। एटीएस अफसरों को जिसका डर था आखिर वहीं हुआ। अफसरों का कहना है कि कई बार बातचीत करने के बाद भी जम्मू कश्मीर के पुलिस अफसर मदद नहीं कर रहे थे। यहीं कारण रहा कि वहां से कुछ फाइलें गायब हो चुकी है। अफसरों का कहना है कि इस मामले में अब कर्मचारियों से पूछताछ की कोशिश करेंगे। संभव है पूछताछ की अनुमति मिल जाए तो केस में और ज्यादा मदद मिले।
जम्मू कश्मीर पुलिस नहीं कर रही सहयोग -
एटीएस अफसरों ने बताया कि देश के करीब पांच राज्यों में पांच हजार से भी ज्यादा लोगों ने बिना जम्मू कश्मीर गए वहां की नागरिकता ली और उसके बाद वहां फर्जी हथियार लाइसेंस बनवा लिए। लाइसेंस जारी करने में मध्य प्रदेश और राजस्थान के दो दलाल जम्मू कश्मीर गृह विभाग के कर्मचारियों के संपर्क में रहे और उनकी मदद से इन दोनों दलालों ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और एमपी तक में हथियार लाइसेंस जारी कर दिए। तीन से पांच सालों तक लगातार यह काम चला और इस बीच दलालों ने करोड़ों रुपया कमाया। इतना रुपया कमाया कि अरबी घोडे और महंगी कारें तक खरीद डाली। कुछ समय पहले जब एटीएस को कुछ सूचनाएं मिली तब जाकर पूरा मामला खुला। उसके बाद जम्मू कश्मीर पुलिस से कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने सहयोग नहीं दिया।
पचास से ज्यादा हिस्ट्रीशीटर्स ने बनवा लिए लाइसेंस -
एटीएस अफसरों ने बताया कि करीब दो सौ से ज्यादा फाइलें जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से गायब हैं। इन फाइलों के बारे में राजस्थान एटीएस की टीम को राजस्थान, गुजरात और एमपी से गिरफ्तार तीस लोगों से पूछताछ के बाद जानकारी मिली है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि राजस्थान के पचास से भी ज्यादा हिस्ट्रीशीटर्स ने भी तीन से पांच लाख रुपए में जम्मू से फर्जी हथियार लाइसेंस बनवा लिए थे।
पूछताछ के लिए भेजे नोटिस, नहीं आ रहे लोग-
एटीएस अफसरों ने कहा कि करीब दो महीने से चल रहे इस मामले में अब तक करीब दो सौ से भी ज्यादा लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ की तैयारी है। लेकिन नोटिस देने के बाद भी उनमें से कई लोगों ने एटीएस से संपर्क नहीं किया है। अफसरों का मानना है कि जब मामला खुला तो उसके बाद बहुत से लोग भूमिगत हो गए हैं। एटीएस ने उन लोगों की गिरफ्तारी की तैयारी कर ली है।
Published on:
21 Nov 2017 11:07 am
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