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राजस्थान में इस फर्ज़ीवाड़े ने पार कर डाली हदें, खुलासा हुआ तो फटी की फटी रह गईं हर किसी की आंखें

locationजयपुरPublished: Apr 22, 2018 02:44:20 pm

Submitted by:

Nakul Devarshi

फर्ज़ीवाड़े का चौंका देने वाला मामला सामने आया है। इसके खुलासा होने के बाद हर कोई सन्न है।

rajasthan malpani center
जयपुर।

राजधानी के मालपाणी अस्पताल में अनपढ़ ग्रामीणों पर धोखे से दवा के प्रयोग के मामले में एक और खुलासा हुआ है। ग्लैनमार्क कंपनी द्वारा विकसित जिस दवा का अस्पताल में प्रयोग किया जा रहा था, वह 40 से 70 वर्ष की उम्र के रोगियोंं के लिए थी। मगर यहां यह नौजवानों को दे दी गई। चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि यह दवा घुटने व कुल्हे की हड्डियों के दर्द से जुड़े रोग ऑस्टियोऑर्थराइटिस के उपचार के लिए तैयार की गई है, जबकि जिन्हें ट्रायल के लिए चुना गया वे कभी भी इस रोग से पीडि़त ही नहीं रहे।
 

'राजस्थान पत्रिका' ने चूरू जिले की बीदासर तहसील के डेगारिया गांव से लाए गए लोगों और उनके परिजनों से बात की। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें कभी जोड़ों में दर्द, हड्डियों की बीमारी और ऑस्टियोऑर्थराइटिस तरह की बीमारी नहीं हुई। कालूराम (23), ओमाराम (23), सोहनलाल (18) और सांवरलाल (25) ने तो चौंकते हुए बताया कि किस तरह की बीमारी और किस तरह का ट्रायल, उन्हें तो दिहाड़ी भुगतान का कहकर बुलाया गया था।
 

यहां के थे ग्रामीण : चूरू जिले की बीदासर तहसील के डिगारिया गांव के 21 लोग व अलीपुर भरतपुर के 7 लोग।

 

शर्त का उल्लंघन
केंद्र सरकार की क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री द्वारा ग्लैनमार्क कंपनी के इस ट्रायल को अनुमति प्रदान की गई है। पत्रिका पड़ताल में साफ हुआ है कि अनुमति की पहली शर्त है कि यह ट्रायल सिर्फ 40 से 70 साल के ऑस्टियोऑर्थराइटिस रोगियों पर ही किया जाना है। मालपाणी अस्पताल में इसका सीधे तौर पर उल्लंघन हो रहा था।
 

डॉ. गुप्ता के नाम ट्रायल
ग्लैनमार्क कंपनी का यह ट्रायल देश में 38 अस्पतालों में चल रहा है। मालपाणी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव गुप्ता को कंपनी यह ट्रायल करने के लिए चयनित किया है।
 

दलाल किए तैनात
मालूम चला है कि मालपाणी अस्पताल में ट्रायल के रोगियों के लक्ष्य पूरे करने के लिए दलाल तैनात किए गए हैं। इनके जरिए दूर दराज के गांवों से लोगों को यहां लाया जा रहा था।
 

'ट्रायल मैं कर रहा हूं लेकिन लोगों को कौन लाया मालूम नहीं'
(ट्रायल करने वाले डॉ.राजीव गुप्ता से सीधी बात)
पत्रिका : मालपाणी अस्पताल में जो ट्रायल चल रहा है, आपके नाम से पंजीकृत है?
डॉ. गुप्ता : हां, बिल्कुल मेरे नाम से ही पंजीकृत है।
पत्रिका : ट्रायल के लिए ऐसे लोग कैसे लाए गए, जिन्हें बीमारी ही नहीं ?
डॉ. गुप्ता : मुझे खुद को नहीं पता कि इन्हें किस तरह मालपाणी अस्पताल में लाया गया।
पत्रिका : गांव से मरीजों को लाया गया तो वहां डॉक्टर जाकर शिविर लगाते और चयनित कर लाया जाता, ऐसे कैसे किसी के भी जरिए मरीजों को लाया गया ?
डॉ. गुप्ता : मैं कह रहा हूं ना कि इन्हें किस तरह लाया गया और क्यों लाया गया, मुझे नहीं पता, मेने तो खुद आज अखबारों में देखा तो मुझे इस मामले का पता लगा

चिकित्सा विभाग ने रिकॉर्ड किया सीज
इधर, यह पूरा मामला सामने आने के बाद मालपाणी अस्पताल में चल रहे इस ट्रॉयल की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन के अतिरिक्त निदेशक डॉ.रविप्रकाश सहित अन्य अधिकारी शनिवार दोपहर अस्पताल पहुंचे और यहां के रिकॉर्ड की जांच की। साथ ही यहां मौजूद डॉक्टरों व अन्य स्टाफ के बयान भी लिए। डॉ. रविप्रकाश ने बताया कि पंजीकृत डॉ. राजीव गुप्ता व संबंधित मरीज वहां नहीं मिले। अस्पताल में मौजूद ट्रॉयल से संबंधित रिकॉर्ड को सीज कर दिया गया है।

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