शहर के रणजीत नगर में यूआईटी ने मंगलवार को अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। रणजीत नगर आवासीय योजना की करीब 7 हजार वर्गगज जमीन से अतिक्रमण हटाया गया। जमीन पर भूखण्ड बना कर चारदीवारी व कच्चा पक्का निर्माण कर लिया गया था।
यूआईटी अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में जेसीबी से चारदीवारी तोड़ी। विरोध करने वालों के दस्तावेज देखे।
उसके बाद उनको समझाया गया कि यह यूआईटी की जमीन है। इस पर किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता। अतिक्रमण से मुक्त कराई जमीन की कीमत करीब 20 से 22 करोड़ रुपए है।
करीब 22 करोड़ रुपए की जमीन
रणजीत नगर यूआईटी की करीब 25 वर्ष से अधिक पुरानी आवासीय कॉलोनी है। यहां करीब 20 से 25 हजार रुपए वगर्गज जमीन का बाजार भाव है। सात हजार वर्गगज में से करीब 30 प्रतिशत जमीन व्यावसायिक है।
इसकी कीमत और भी ज्यादा है। इसके हिसाब से अतिक्रमण से मुक्त कराई पूरी जमीन करीब 20 से 22 करोड़ रुपए की है। यूआईटी इस जमीन को जल्दी बेचने की तैयारी भी कर रही है।
फॉर्म हाउस बना लिए
आवासीय योजना रणजीत नगर में 200 से 300 वर्गगज के करीब 10 भूखण्डों पर चारदीवारी भी कर ली गई। पौन बीघा जमीन पर फॉर्म हाउसनुमा कब्जा था। अधिकतर के चारदीवारी थी।
कुछेक ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए कार्रवाई का विरोध भी किया। इसके बाद तहसीलदार सोहन सिंह नरूका ने उनके दस्तावेज देखे। फिर उनको समझाया कि जमीन यूआईटी की है।
सवाल का जवाब मांगते शहरवासी
रणजीत नगर में करीब सवा तीन बीघा जमीन पर अतिक्रमण हो गया था। इस भूमि पर भूखण्ड बना कर चारदीवारी कर ली गई, तब तक यूआईटी के जेईएन चुप बैठे रहे। उन्होंने अधिकारियों को अवगत ही नहीं कराया।
यदि अधिकारियों तक अतिक्रमण की सूचना पूर्व में पहुंची तो कार्रवाई क्यूं नहीं की गई। इस तरह की चर्चा भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान रही। हालांकि यह अतिक्रमण करीब दो साल पुराना है।