
ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों को पैसे देकर बाजार से लैंस लाने पड़ रहे हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2011 में नि:शुल्क दवा योजना शुरू करने के कुछ समय बाद नेत्र रोगियों को लगाए जाने वाले लैंस को भी निशुल्क श्रेणी में शामिल कर लिया था। लेकिन, अब भी मरीजों को लैंसों के लिए पर्ची थमाकर बाजार का रास्ता दिखाया जा रहा है।
अधिक जरूरत व उपयोग वाले नंबरों के लैंस की शॉर्ट सप्लाई हो जाते हैं। मरीज को तुरंत जरूरत हो तो वह अपनी इच्छा से बाहर से ले आता है। कुछ मामलों को छोड़ दें तो लैंसों की नियमित आपूर्ति हो रही है और प्राय: नि:शुल्क वाले लैंस ही लगाए जा रहे हैं।
डॉ. रेखा सिंह, अधीक्षक, जयपुर अस्पताल
ऐसे कई उदाहरण
किसी न किसी अस्पताल में किसी न किसी न बर के लैंस की अनुपलब्धता प्राय: बताई ही जाती रही है। फिर शॉर्ट सप्लाई का हवाला दे मरीज को लैंस बाहर से लाने को कह दिया जाता है। जयपुर अस्पताल में एक मरीज को लैंस की जरूरत पड़ी तो लेकिन जवा मिला, उपलब्ध नहीं है। उसे बाजार से लैंस लाने को कहा गया। बाद में उसने भामाशाह योजना में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया। सवाई मानसिंह अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
जिम्मेदारों में हड़कंप, कहां गायब हो रहीं दवाएं
नि:शुल्क दवा योजना में सूचीबद्ध दवाओं की राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन से शत-प्रतिशत आपूर्ति के दावे के बाद इस पूरी चेन में शामिल जि मेदारों में शनिवार को हड़कंप मच गया। राजस्थान पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने के बाद आरएमएससी **** ड्रग वेयर हाउस के जि मेदार पड़ताल में जुट गए कि दवाओं की आपूर्ति पूरी हो रही है तो मरीजों को मिल क्यों नहीं रही।
योजना को सरकार कर रही कमजोर : कांग्रेस
कांगेस ने सरकार पर नि:शुल्क दवा योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा कि योजना के सही क्रियान्वयन में चिकित्सा तंत्र विफल हो रहा है। दवाएं पूरी मिल रही हैं तो मरीजों को दी क्यों नहीं जा रहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा ने कहा कि नि:शुल्क दवा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
मनाही तो प्रावधान में ही नहीं
योजना शुरू करने के साथ स्थानीय निधि की व्यवस्था भी की गई थी। ताकि सूचीबद्ध दवाएं हर हाल में मरीजों को उपलब्ध कराई जाएं। यानी, कभी दवा आपूर्ति बाधित रहे तो अस्पताल स्थानीय निधि में से दवा खरीदकर मरीजों को उपलब्ध कराए। मरीज की पर्ची पर अनुपलब्धता का ठप्पा लगाने का तो योजना में कोई प्रावधान ही नहीं है। इसके बावजूद दवा काउंटरों पर हर पर्ची पर धड़ल्ले से अनुपलब्धता के ठप्पे लगा रहे हैं।
Published on:
06 Aug 2017 02:20 pm
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