17 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Free Medicine Scheme: राजस्थान में मुफ्त दवा योजना में बड़ा खेल, रेट कांट्रेक्ट के बिना खरीद जा रही मेडिसिन

Rajasthan Free Medicine Scheme: राजस्थान में नि:शुल्क दवा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की नियमित आपूर्ति करने के लिए बनाए गए तंत्र की विफलता के चलते अब “लोकल परचेज” का चलन लगातार बढ़ रहा है।

2 min read
Google source verification
Free Medicine Scheme

अस्पताल में दवाई के लिए लगी लाइन। फोटो: पत्रिका

Free Medicine Scheme in Rajasthan: जयपुर। राजस्थान में नि:शुल्क दवा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की नियमित आपूर्ति करने के लिए बनाए गए तंत्र की विफलता के चलते अब “लोकल परचेज” का चलन लगातार बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि हर महीने प्रदेशभर के अस्पतालों में हजारों पर्चियों पर दवाइयां राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) की ओर से उपलब्ध कराए जाने के स्थान पर सीधे अस्पताल स्तर पर खरीदी जा रही हैं।

राजस्थान के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में ही योजना की 1800 से अधिक दवाओं में से लगभग 700 का रेट कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। इसके चलते इन दवाओं को चिन्हित निजी दुकानों से अनियंत्रित कीमतों पर 75 प्रतिशत छूट के दावे के साथ खरीदा जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।

मरीजों को भी झेलनी पड़ रही परेशानी

एसएमएस सहित कई जिला और छोटे अस्पतालों में दवाओं की कमी बनी हुई है, जिससे डॉक्टरों को लोकल परचेज का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वर्तमान में बीपी, शुगर, कैल्सियम, मल्टीविटामिन, हृदय और त्वचा रोगों सहित करीब 100 बीमारियों की दवाइयां सामान्य काउंटरों पर उपलब्ध नहीं हैं।

सप्लाई चैन बिगड़ने के जिम्मेदार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आरएमएससीएल की सप्लाई चेन में बाधाएं इस समस्या की मुख्य वजह हैं। टेंडर में देरी, सप्लायर की कमी और भुगतान विलंब से दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे अस्पतालों को लोकल परचेज करना पड़ता है। इससे अनियमितताएं बढ़ती हैं। कुछ जगहों पर महंगी दरों पर दवाइयां खरीदी जा रही हैं, जबकि वही दवाएं आरएमएससीएल से सस्ती मिल सकती हैं, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

एक से दूसरे काउंटर का चक्कर

सबसे बड़ी समस्या दवा वितरण व्यवस्था की है। लोकल परचेज के लिए अस्पतालों में अलग काउंटर तक व्यवस्थित नहीं हैं। मरीजों को पहले पर्ची बनवाने, फिर अनुमोदन कराने और उसके बाद दवा लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। मरीज को काउंटर पर जाने के बाद उसकी अनुपलब्धता का पता चलने पर उसे लेाकल परचेज वाले दूसरे काउंटर पर जाना पड़ता है। इसके कारण एक-एक पर्ची पर दवा मिलने में दो से चार घंटे तक का समय लग रहा है।

इनका कहना है

मरीजों को अस्पताल से ही दवाइयां मिले, इसलिए लोकल परचेज की व्यवस्था की हुई है। दवाइयों की सप्लाई पूरी रखने का प्रयास होता है। काउंटरों की कमी और अनपुलपब्धता के कारण पता कर आवश्यक कदम उठाये जाएंगे।
-गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री