
जया गुप्ता/जयपुर. राज्य सरकार भले ही महिलाओं व स्कूली बालिकाओं को नि:शुल्क सैनेटरी नैपकिन देने का दावा करे, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक करीब 50 फीसदी महिलाओं व बालिकाओं तक ही नैपकिन पहुंचे हैं। जहां नैपकिन पहुंचे हैं, उनमें भी कई स्थानों पर लड़कियों ने इनकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। राज्य के पिछड़े व आदिवासी इलाके डूंगरपुर व बांसवाड़ा सहित पांच जिलों में सैनेटरी नैपकिन की सप्लाई न के बराबर हुई है। जबकि इन्हीं जिलों की महिलाओं में सर्वाधिक जागरूकता व सैनेटरी नैपकिन की आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने ठीक एक बरस पहले उड़ान योजना शुरू की थी। जिसमें दावा किया गया था कि सभी बालिकाओं व महिलाओं को नि:शुल्क सैनेटरी नैपकिन दिए जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 200 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान भी किया गया। जबकि सितंबर 2022 तक 31 जिलों के 26,220 सरकारी स्कूल व 23 जिलों के 31,255 आंगनबाड़ी केन्द्रों तक ही नैपकिन पहुंचे। अधिकांश केंद्रों तक अभी तक एक बार ही नैपकिन पहुंचे हैं। वहां भी खत्म होने लगे हैं।
इतनी बालिका व महिलाओं को देने थे
आंगनबाड़ी केंद्र ------- 60,361
प्रस्तावित लाभार्थी महिलाएं -- 1,15,26,050
राजकीय स्कूल -- 34,104
प्रस्तावित लाभार्थी छात्राएं -- 26,48,326
कुल लाभार्थी -- 1,41,74,376
यहां तक ही पहुंचे
31 जिलों के 26 हजार 220 राजकीय स्कूल
23 जिलों के कुल 31 हजार 255 आंगनबाड़ी केन्द्र
लड़कियां बोली, क्वालिटी इस्तेमाल करने लायक नहीं
नि:शुल्क सैनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता पर लड़कियों ने ही सवाल उठाए हैं। दो-तीन महीने पहले अलवर जिले में कुछ लड़कियों ने जनसुनवाई के दौरान जिला कलक्टर के सामने नैपकिन की गुणवत्ता का मामला उठाया था। लड़कियों ने कहा था कि नैपकिन की क्वालिटी खराब है, उन्हें इंफेक्शन हो रहा है। बाद में नैपकिन के सैम्पल की जांच करवाई गई तो वे फेल हो गए। उन्हें वापस लिया गया।
कहां-कितने सैनेटरी नैपकिन पहुंचे
जिला -- आंगनबाड़ी -- स्कूल -- कुल नैपकिन
अजमेर --- 336 --- 830 -- 4524672
अलवर -- 1788 -- 2076 -- 13661088
बांसवाड़ा -- 931 --- 0 -- 2538318
बारां --- 598 -- 1609 -- 8186135
बाड़मेर -- 1836 -- 2757 -- 15416088
भरतपुर -- 1092 -- 0 -- 2069712
भीलवाड़ा -- 1457 -- 2205 -- 12357166
बीकानेर -- 681 -- 893 --- 5959464
बूंदी -- 496 --- 822 -- 4394928
चित्तौड़गढ़ -- 1013 -- 0 -- 1488288
चूरू --- 994 --- 1358 -- 7860288
दौसा --- 792 -- 1297 -- 9044064
धौलपुर -- 583 -- 0 -- 1381776
डूंगरपुर -- 679 -- 356 -- 3491422
श्रीगंगानगर -- 950 -- 1943 -- 10069700
जयपुर -- 1819 -- 4120 -- 22835744
जैसलमेर -- 500 -- 757 -- 3036312
झालावाड़ -- 901 -- 1510 -- 10280136
झुंझुनूं -- 357 -- 636 -- 5506200
जोधपुर -- 895 -- 1287 -- 7933596
करौली -- 698 -- 0 -- 1372536
कोटा -- 654 -- 1244-- 6158208
नागौर -- 301 -- 337 -- 2454888
पाली --- 91 -- 477 -- 3477026
प्रतापगढ़ -- 524 -- 1239 -- 5032344
राजसमंद -- 809 -- 0 -- 1331448
सवाई माधोपुर -- 603 -- 0 -- 1232304
सीकर -- 1252 -- 2141 -- 15805692
टोंक -- 263 -- 454 -- 3017664
उदयपुर -- 1574 -- 0 --- 3332136
कुल --- 26220 --- 31255 -- 203147161
(सितम्बर 2022 तक के आंकड़़े)
तो जांच करवाएंगे
- नैपकिन की खरीद व आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने का कार्य आरएमएससीएल (राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लि.) का है। गुणवत्ता के लिए थर्ड पार्टी से इंस्पेक्शन का कार्य भी करवाया जा रहा है। यदि कहीं गुणवत्ता की शिकायत है तो जांच करवाएंगे।
- पुष्पा सत्यानी, निदेशक, महिला अधिकारिता
- नैपकिन की क्वालिटी बहुत खराब थी, बच्चियों को इंफेक्शन हो रहा था। जिस सैम्पल की शिकायत बालिकाओं ने की, केवल उसी सैम्पल की जांच करवाई गई। सरकार नि:शुल्क नैपकिन बांटे मगर उनकी गुणवत्ता अच्छी रखे। ताकि लड़कियां बेहिचक उनका इस्तेमाल कर सके।
- नूर मोहम्मद, फाउंड़र, राजस्थान राइजिंग संस्था
सैनेटरी नैपकिन के उपयोग से इंफेक्शन का खतरा कम
महिलाएं मासिक धर्म के दौरान पुराना कपड़ा इस्तेमाल कर लेती हैं, जिसके कारण इंफेक्शन का खतरा रहता है। सैनेटरी नैपकिन पैकेट में स्टेलरलाइज होता है। उससे इंफेक्शन का खतरा बेहद कम रहता है। यदि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को बार-बार इंफेक्शन होता है तो उससे सर्वाइकल कैंसर तक का खतरा रहता है। सैनेटरी नैपकिन भी 12-24 घंटे के भीतर बदल लेना चाहिए। यदि एक ही सैनेटरी नैपकिन को 24 घंटे से अधिक इस्तेमाल किया जाता है तो उससे भी इंफेक्शन का खतरा रहता है।- डॉ. राखी, एसोसिएट प्रोफेसर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
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Published on:
22 Dec 2022 08:28 pm
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