7 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

छात्रों से लेकर प्रधानाचार्य ने मिलकर यूँ सुधारी इस स्कूल की सूरत

https://www.patrika.com/rajasthan-news/

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Jyoti Patel

Aug 07, 2018

rajasthan news

छात्रों से लेकर प्रधानाचार्य ने मिलकर यूँ सुधारी इस स्कूल की सूरत

हनुमानगढ़. रामपुरा के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक मेघराज सहारण ने भामाशाहों, दानदाताओं और विद्यार्थियों के सहयोग से शाला का सोंदर्यकरण और विकास करवाया साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कार्य किया। इतना ही नहीं उनकी पत्नि संतोष सहारण ने भी पति की प्रेरणा पर शाला के विकास में आर्थिक सहयोग प्रदान कर एक मिशाल पेश की। शाला में शिक्षा की उच्चतर गुणवता और विकास को देखकर ग्रामीण अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकलकर राजकीय विद्यालय में प्रवेश दिला रहे हैं।

विद्यालय में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष में करीब 120 ज्यादा नामांकन हुए। विद्यालय के सोंदर्यकरण और विकास में शिक्षक मेघराज सहारण सहित प्रधानाचार्य अश्विनी कुमार शर्मा, मेघराज सहारण की पत्नि संतोष सहारण सूरतगढ सहित शाला स्टाफ और अन्य दानदाताओं ने छत्त पंखे, ग्रीन बोर्ड, फर्नीचर देकर काफी योगदान दिया हैं। इन सभी पुण्यार्थ कार्यो के लिए वरिष्ठ अध्यापक मेघराज सहारण ने दानदाताओं को प्रेरित किया। शिक्षक सहारण का उल्लेखनीय योगदान शाला के विकास एवं शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को लेकर विज्ञान विषय के वरिष्ठ अध्यापक मेघराज सहारण का गत दो वर्षो से शत प्रतिशत परिणाम रहा।

सहारण ने ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश में भी अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारा। इसके अलावा शाला में हरियाली की दृष्टि से बाग बगीचे, दूब, हरे वृक्ष लगाकर पर्यावरण को भी सुरक्षित करने का बीड़ा उठाया। सहारण ने समय समय पर स्टाफ की मदद से जरूरमंद छात्रों की सहायता भी की। शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए वह जिलास्तर पर सम्मानित हुए। इतना ही नहीं सहारण की प्रेरणा ने शाला के कक्षा 10 व 12 के विद्यार्थियों ने अपनी जेबखर्च के पैसे बचाकर शाला के विकास में योगदान के लिए आर्थिक सहयोग दिया।

माणकथेड़ी के राउमावि में भी सहारण ने अपने कार्यकाल में भामाशाहों को प्रेरित कर करीब ढाई लाख रूपयों से शाला का विकास करवा उत्कृष्ट सेवा कार्य किए। उनके ऐसे ही प्रयासों से रामपुरा के राआउमावि में उत्तरोतर विकास हो रहा है जिसमें परीक्षा परिणाम, नामांकन और आर्थिक सहयोग शामिल है।