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टोल में दबा दिया आपकी वैकल्पिक राह का मूल अधिकार

शहरों के चारों तरफ टोल रोड का जाल फैलने के बाद आम आदमी का 'स्वतंत्र विचरण' का अधिकार खोता जा रहा है

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टोल में दबा दिया आपकी वैकल्पिक राह का मूल अधिकार

टोल में दबा दिया आपकी वैकल्पिक राह का मूल अधिकार

भवनेश गुप्ता
जयपुर। शहरों के चारों तरफ टोल रोड का जाल फैलने के बाद आम आदमी का 'स्वतंत्र विचरण' का अधिकार खोता जा रहा है। ऐसे वैकल्पिक रोड खत्म कर दिए गए हैं जिसका उपयोग ऐसे लोग कर सकें जो ज्यादा सुविधा लेना नहीं चाहते हों। बीओटी (बिल्ट-आॅपरेट-ट्रांसफर) और पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर प्रोजेक्ट बनाए जाने के बाद लोगों को दूसरे वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होना ही बंद हो गए हैं। ज्यादातर राजमार्गों पर यही हालात हैं।

जबकि, संविधान में नागरिकों को मूल अधिकार मिले हुए हैं। इसमें स्वतंत्रता का अधिकार भी है जिसके तहत भारतीय नागरिक भारतीय सीमा में कहीं भी आजादी से आ और जा सकता है। लेकिन सरकार ने बीओटी-पीपीपी मोड़ पर सड़क परियोजनाएं शुरू कर स्वतंत्र विचरण का अधिकार छीन लिया है। टोल शुल्क दिए बिना आप उस मार्ग से नहीं गुजर सकते। हालत यह है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने शहर से 25-30 किलोमीटर दूर भी किसी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े शहर या कस्बे में जाना है तो उसे एक बार तो टोल देना ही पड़ेगा।

इन माननीयों को छूट, इसलिए लोगों की परेशानी का अहसास कम
राजमार्गों पर बने टोल से कई माननीयों को टैक्स से छूट का प्रावधान हैं। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्र व राज्य के मंत्री, सांसद, विधायक, स्पीकर, मजिस्ट्रेट, आईएएस, आईपीएस अफसरों को टोल से छूट है। कुछ माह पहले एनएचएआई ने इनकी अपडेट सूची जारी की थी। इन्हीं के पास नियम-कायदे बनाने का अधिकार है। संभव है कि इसी कारण लोगों की परेशानी का अहसास कम है।

यहां परेशानी होती रही
-सीकर रोड पर टाटियावास टोल प्लाजा के ठीक पहले बाईं ओर रास्ता है। वाहन चालक इस रूट जाने लगे तो टोल रोड की अनुबंधित कंपनी ने यहां बेरिकेड्स लगा दिए। मामले ने तूल पकड़ा तो उपर तक पहुंचा तो बेरिकेड्स हटाए गए। हालांकि, वैकल्पिक रूट अपनाने वाले लोगों को अब भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-अजमेर रोड पर ठिकरिया गांव के पास टोल प्लाजा है और प्लाजा से ठीक 300 मीटर पहले दांईं ओर गांव की तरफ रास्ता जा रहा है। यही रास्ता वापिस अजमेर रोड पर मिल रहा है। इस वैकल्पिक रूट के उपयोग को रोकने की भी कोशिश हो चुकी है।


स्टडी में अन्तरराष्ट्रीय कंपनी ने माना, विकल्प नहीं होने से रोष
अन्तरराष्ट्रीय कंपनी फिच रेटिंग ने भारत में टोल रोड पर स्टडी की। इस रिपोर्ट में सामने आ चुका है कि टोल रोड का पूरा काम होने से पहले या बदहाल रोड होने पर भी टैक्स वसूलना, स्थानीय लोगों को वैकल्पिक रूट नहीं देना विरोध बढ़ने का मुख्य कारण है। अनुबंध में टोल टैक्स का नुकसान नहीं होने से जुड़ा प्रावधान इसकी मुख्य वजह है। इस कारण वैकल्पिक रूट विकसित होने पर भी उससे गुजरने से रोका जाता है।

विदेशों में उपलब्ध है टोल रोड का विकल्प
-दुनिया के कई शहरों में टोल रोड का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है, जहां से वाहन चालकों को गुजरने की अनुमति है। इसमें आस्ट्रेलिया, कनाड़ा, बार्सिलोना शहर प्रमुख है। यहां टोल फ्री सड़कें उपलब्ध कराई गई हैं।

-भारत में कई वाहन चालक ऐसे वैकल्पिक रूट चाहते हैं, भले ही वह लम्बा या घुमावदार ही क्यों न हो। लेकिन ऐसे विकल्प ज्यादा नहीं है।

-टोल टैक्स प्रभावित होने की आशंका के चलते सरकार वैकल्पिक मार्गों को सुधारने में अनदेखी कर रही है।


Experty—यदुवेन्द्र माथुर, पूर्व सचिव, नीति आयोग

ईंधन खपत कम हो, गंतव्य स्थान तक जल्द पहुंच सकें और वाहन की कंडिशन सही रहे, इसके लिए टोल रोड बनाए जाते रहे हैं। इसका मतलब यह है नहीं कि पहले से उपलब्ध दूसरे रूट को बंद कर दिया जाए। ऐसे रूट को ज्यादातर स्थानीय लोग उपयोग करते हैं। ऐसे रूट होने चाहिए। भारत में मुंबई-पूणे हाइवे इसका उदाहरण है। यहां नया हाइवे बन गया लेकिन पुराना रूट अब भी चालू है। इस रूट को टोल मुक्त किया हुआ है। ऐसे रूट तलाशे जा सकते हैं जिससे लोगों की अपेक्षा भी पूरी हो सके। हालांकि, यह जरूरी नहीं की इन रूट पर टोल रोड जैसी सुविधा मिले। ऐसा हो जाएगा तो टोल रोड का उपयोग होगा ही नहीं।